11.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

रतनी प्रखंड के कई गांवों के खेतों में घुसा बाढ़ का पानी, किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

कृषि पदाधिकारी ने लिया खेतों का जायजा हाइब्रिड और शॉर्ट टर्म बीज उपलब्ध करायेगा विभाग रतनी : मौसम के साथ हमेशा से जुआ खेलने की नीयती रखनेवाले किसानों की परेशानी एक बार फिर से बढ़ गयी है. इस बार अतिवृष्टि ने उनके धान के बिचड़े को लील गया है. पहले लगातार हो रही बारिश से […]

कृषि पदाधिकारी ने लिया खेतों का जायजा
हाइब्रिड और शॉर्ट टर्म बीज उपलब्ध करायेगा विभाग
रतनी : मौसम के साथ हमेशा से जुआ खेलने की नीयती रखनेवाले किसानों की परेशानी एक बार फिर से बढ़ गयी है. इस बार अतिवृष्टि ने उनके धान के बिचड़े को लील गया है. पहले लगातार हो रही बारिश से छोटी-बड़ी नदियों का जल स्तर बढ़ा और अब खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया है.
रतनी प्रखंड के 20 से अधिक गांवों के किसानों के समक्ष प्रकृति की इस विनाशलीला से जीवनयापन पर संकट आ खड़ा हुआ है. खेतों में जलभराव के चलते धान की खेती पर संकट गहरा गया है. किसानों की मुश्किलें इस कदर बढ़ गयी है कि इधर वे धान की रोपनी के लिए जुताई-निकाई आदि कर खेतों की तैयारी में जुटे थे, तो उधर सैकड़ों एकड़ में डाले गये बिचड़े जलमगA होकर गल गये. बरबाद हुए बिचड़े से रोपनी पर आफत आ गयी है. इस बीच कृषि पदाधिकारी ने जलभराव वाले खेतों का जायजा लिया और किसानों को हाइब्रिड और शॉर्ट टर्म बीज उपलब्ध कराने का भरोसा दिया.
बाहर से बिचड़े की व्यवस्था में जुटे किसान : बाढ़ से तबाह किसान फिर से बिचड़ा डाल रहे हैं. कुछ किसान क हीं बाहर से बिचड़े की व्यवस्था करने में जुटे हैं. फिलहाल बिचड़ा गल जाने के कारण रोपनी कार्य सुस्त पड़ गया है. बताया गया कि आगे अच्छी पैदावार के लिए किसानों ने बीज डालते समय ही बेहतर किस्म के धान और महंगे खाद का प्रयोग किया था.
ऐसे में रोपनी के पहले ही बिचड़ा गल जाने से अधिकतर किसानों का हौसला जवाब दे गया है. हालांकि गले हुए बिचड़े को किसी तरह बचाने की जुगत में किसान लगे हुए हैं, ताकि थोड़ी बहुत भी रोपनी हो सके. किसानों का कहना है कि बिचड़ा डालने का अब समय बचा नहीं, ऐसे में या तो खेत परती रह जायेगी या फिर मक्का की खेती कर कुछ नुकसान की भरपाई करेंगे.
हालांकि बाढ़ से हुई क्षति के आकलन के लिए जिला कृषि पदाधिकारी शंकर कुमार झा ने प्रखंड के कई गांवों का दौरा किया. उन्होंने बताया कि कई गांवों में बिचड़े की क्षति हुई है. इसके लिए किसानों को प्रखंड में अनुदानित दर पर हाइब्रिड व शॉर्ट टर्म बीज की व्यवस्था की गयी है. इच्छुक किसान बीज खरीद कर धान की खेती के लिए बिचड़ा तैयार कर सकते हैं.
प्रति एकड़ पचास हजार का होगा नुकसान : कुछ किसानों का कहना है कि अब बिचड़ा डालने का समय निकल गया है. ऐसे में जो किसान धान का बिचड़ा डालेंगे और उससे धनरोपनी करेंगे, तो अच्छी पैदावार नहीं होगी. इससे अच्छा है कि मक्का की खेती करेंगे. अगर धान की रोपनी नहीं हुई,
तो किसान को प्रति एकड़ पचास हजार रुपये का नुकसान ङोलना पड़ सकता है. ऐसे मे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही है. वहीं खेत परती रहने पर खाद-बीज की लागत का भी नुकसान होगा.
Prabhat Khabar Digital Desk
Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel