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आरा में नये नियम के बाद न के बराबर हो रही जमीन की रजिस्ट्री

Updated at : 13 Apr 2024 10:38 PM (IST)
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आरा में नये नियम के बाद न के बराबर हो रही जमीन की रजिस्ट्री

भोजपुर जिले में नये नियम के बाद जमीन खरीद-बिक्री नहीं के बराबर हो रही है़ इससे सरकार को भी राजस्व की क्षति हो रही है.

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भोजपुर जिले में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर सरकार द्वारा नये नियम के अस्तित्व में आने के बाद लोगों को काफी परेशानी हो रही है. सरकार को भी राजस्व की क्षति हो रही है. इसे देखते हुए सरकार ने गांव-गांव में जाकर शिविर लगाकर लोगों की जमाबंदी कायम करने का निर्देश दिया है. जिलाधिकारी द्वारा भी सभी अंचलों में इसके लिए निर्देश दिया गया है. हालात यह है कि अंचलाधिकारियों द्वारा इसमें दिलचस्पी नहीं ली जा रही है. लोगों की जमाबंदी कायम नहीं की जा रही है. ऐसे में अपनी जरूरत के अनुसार जमीन की बिक्री करनेवाले ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. उनके कई कार्य नहीं हो पा रहे हैं. इस कारण निबंधन कार्यालयों में सन्नाटे की स्थिति बनी रह रहती है. लोगों में काफी निराशा है. कुछ अंचलों के गांव में इसकी शुरुआत भले कर दी गयी है, पर अपेक्षित परिणाम नहीं आ पा रहा है. राजस्व कर्मचारी खानापूर्ति कर रहे हैं. कई तरह की शर्त लगा रहे हैं. इस कारण इस कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है.

पूर्वजों के नाम पर है

अधिकतर लोगों के दस्तावेज :

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ऐसी है कि यदि कोई किसी की जमीन की खरीदारी करता है, तो अधिकतर खरीदारी करके शांत हो जाते हैं. जमीन में खेती-बाड़ी भी करने लगते हैं, पर नामांतरण करने में काफी सुस्ती बरतते हैं. इस कारण दो से तीन पीढ़ी के पहले के पूर्वजों के नाम पर ही जमीन है. ऐसे में नए नियम के अनुसार कोई जमीन नहीं बेच सकता है.

सुविधा के लिए सरकार ने दिया है निर्देश : जिले में सरकार के नियम की अनदेखी की जा रही है. गांव में नामांतरण एवं जमाबंदी के लिए शिविर नहीं लगाया जा रहा है. कहीं किसी गांव में संयोगवश शिविर लग भी रहा है, तो एक कर्मचारी पहुंच रहा है एवं आधा से एक घंटा ठहर कर बिना कुछ किये वापस लौट जा रहा है. ऐसे में लोगों की सुविधा की स्थिति क्या बनेगी, इसे आसानी से समझा जा सकता है. फिर भी जिला प्रशासन द्वारा इस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है.

22 फरवरी से ही लागू है नया नियम :

22 फरवरी से जमीन निबंधन के लिए सरकार द्वारा बनाये गये नये नियम को लागू कर दिया गया है. इसका पालन कड़ाई से किया जा रहा है. जिनके नाम से जमीन का निबंधन नहीं है जमाबंदी में नाम का उल्लेख नहीं है वैसे लोगों का निबंध नहीं किया जा रहा है.

210 करोड़ राजस्व निर्धारित है लक्ष्य : जिले में निबंधन कार्यालयों से सरकार ने वर्ष 2024 – 25 के लिए 210 करोड़ राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है. इनमें आरा निबंधन कार्यालय, जगदीशपुर निबंधन कार्यालय एवं पीरो निबंधन कार्यालय शामिल हैं. नये नियम के अनुसार इस लक्ष्य को पाना काफी मुश्किल है. इसे लेकर आरा निबंधन कार्यालय के उपनिबंधक तारकेश्वर पांडेय ने बताया कि शत-प्रतिशत लक्ष्य पाना काफी मुश्किल है. पहले लगभग 90% तक लक्ष्य की प्राप्ति होती थी, पर इस नियम के बाद प्रयास किया जायेगा कि 80% भी लक्ष्य की प्राप्ति हो जाये.

काफी कम हुआ निबंधन व राजस्व की प्राप्ति :

नये नियम के बाद सामान्य दिनों की तुलना में लगभग एक तिहाई जमीन का ही निबंधन हो रहा है. इस कारण निबंधन कार्यालय में काफी कम संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2022 – 23 में 22 फरवरी से 12 अप्रैल, 2023 तक 2495 जमीन के दस्तावेजों का निबंधन हुआ था. वहीं कुल राजस्व की प्राप्ति 12 करोड़ 21 लाख 20 हजार 78 रुपए हुई थी. इसमें आरा निबंधन कार्यालय में 1400 जमीनों के दस्तावेजों का निबंधन हुआ था. वहीं जगदीशपुर निबंधन कार्यालय में 780 जमीनों के दस्तावेजों का निबंधन हुआ था एवं पीरो निबंधन कार्यालय में 434 जमीनों के दस्तावेजों का निबंधन हुआ था, जबकि आरा निबंधन कार्यालय को सात करोड़ 35 लाख 53 हजार 26 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई थी. जगदीशपुर निबंधन कार्यालय को तीन करोड़ 66 लाख 60 हजार 345 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई थी एवं पीरो निबंधन कार्यालय को एक करोड़ 90 लाख 60 हजार 707 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2023- 24 की इसी अवधि के दौरान जिले के तीनों निबंधन कार्यालय को मिलाकर कुल 883 जमीनों के दस्तावेजों का निबंधन हो पाया है. इसमें आरा निबंधन कार्यालय में 618 जमीनों के दस्तावेजों का निबंधन हो पाया है. वहीं जगदीशपुर निबंधन कार्यालय में 325 जमीनों के दस्तावेज का निबंध हो पाया है. वहीं पीरो निबंधन कार्यालय में कुल 225 जमीनों के दस्तावेजों का निबंध हो पाया है. आरा निबंधन कार्यालय से इस अवधि में चार करोड़ पांच लाख एक हजार 704 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई है, जबकि जगदीशपुर निबंधन कार्यालय से एक करोड़ 95 लाख 90 हजार 592 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई है. वहीं, पीरो निबंधन कार्यालय से 55 लाख 68 हजार 575 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई है.

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