बीएड प्रवेश परीक्षा खत्म होते ही आरा जंक्शन पर उमड़ा परीक्षार्थियों का सैलाब, ट्रेन में पैर रखने की जगह नहीं

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आरा जंक्शन पर उमड़ा जन सैलाब

Arrah News: बिहार बीएड प्रवेश परीक्षा के बाद आरा रेलवे जंक्शन पर परीक्षार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थी परीक्षा खत्म होते ही अपने घरों को लौटने के लिए स्टेशन पहुंचे, जिससे ट्रेनों और प्लेटफॉर्मों पर पैर रखने की जगह नहीं बची. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आरपीएफ और जीआरपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

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Arrah News: (आशुतोष पाण्डेय की रिपोर्ट) बिहार में रविवार को बीएड प्रवेश परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई. परीक्षा खत्म होते ही परीक्षा केंद्रों से निकलकर परीक्षार्थियों का हुजूम सीधे आरा रेलवे जंक्शन की ओर बढ़ने लगा. भोजपुर जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने पहुंचे पड़ोसी जिलों के हजारों अभ्यर्थी अपने-अपने गंतव्य और गृह जिलों की ओर लौटने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे. इसके कारण जंक्शन परिसर, टिकट काउंटर और लगभग सभी ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली.

विशेषकर पटना, बक्सर, सासाराम और मुगलसराय की ओर जाने वाली ट्रेनों में सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक भीड़ दर्ज की गई. जैसे ही कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आ रही थी, उसमें सवार होने के लिए परीक्षार्थियों के बीच आपाधापी की स्थिति बन जा रही थी.

चैन पुलिंग रोकने के लिए आरपीएफ और जीआरपी अलर्ट

रेलवे जंक्शन पर अचानक यात्रियों और परीक्षार्थियों की अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड में आ गया. जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी. प्लेटफॉर्म और रेल पटरियों पर भीड़ को नियंत्रित करने तथा ट्रेनों में जबरन चढ़ने, अनधिकृत रूप से वैक्यूम करने या चैन पुलिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) एवं सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के जवानों ने संयुक्त मोर्चा संभाला.

सुरक्षा कर्मियों की अलग-अलग टीमें स्टेशन परिसर, सभी प्लेटफॉर्मों और फुट ओवरब्रिज पर लगातार गश्त करती नजर आईं. उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को सुरक्षित तरीके से कतारबद्ध होकर ट्रेन में चढ़ने और उतरने के लिए लगातार आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे. आरपीएफ के अधिकारियों ने बताया कि परीक्षार्थियों की भारी तादाद को पहले ही भांप लिया गया था, जिसके कारण विशेष सतर्कता बरती गई ताकि कोई भी अप्रिय घटना या दुर्घटना न हो सके.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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