आरा में हजारों मवेशियों पर मंडरा रहा बरसाती बीमारियों का खतरा, टीकाकरण नहीं होने से पशुपालक चिंतित

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Arrah Cattle Vaccination : आरा जिले में पशुपालन से जुड़े किसान बरसाती बीमारियों को लेकर चिंतित हैं. पशुपालकों का आरोप है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मुफ्त टीकाकरण योजना प्रभावी ढंग से नहीं चलाई जा रही है, जिससे मवेशियों में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है.

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Arrah Cattle Vaccination : आरा जिले में बड़ी संख्या में किसान पशुपालन से जुड़े हैं. सरकार पशुधन विकास और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन पशुपालकों का कहना है कि बरसाती बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी नि:शुल्क टीकाकरण अभियान प्रभावी ढंग से नहीं चलाया जा रहा है. इससे पशुओं में संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है.

पशुपालकों ने लगाए खानापूर्ति के आरोप

स्थानीय पशुपालकों का आरोप है कि विभाग की ओर से नियमित टीकाकरण शिविर आयोजित नहीं किए जाते. उनका कहना है कि कई बार मांग करने पर ही पशु चिकित्सक गांव पहुंचते हैं और कई मामलों में दवाओं के लिए शुल्क भी लिया जाता है. पशुपालकों का सवाल है कि जब सरकार नि:शुल्क टीकाकरण की व्यवस्था की बात करती है, तो उनसे पैसे क्यों लिए जाते हैं.

बरसात में बढ़ जाता है संक्रामक रोगों का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार बरसात और उसके बाद का समय मवेशियों के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है. इस दौरान गलघोंटू, खुरपका-मुंहपका और लंगड़िया जैसे संक्रामक रोग तेजी से फैल सकते हैं. इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण माना जाता है, क्योंकि कुछ संक्रामक रोगों का प्रभावी उपचार सीमित होता है.

किन बीमारियों का रहता है सबसे अधिक खतरा

बरसाती मौसम में मवेशियों में गलघोंटू, खुरपका-मुंहपका और लंगड़िया जैसी बीमारियां अधिक देखने को मिलती हैं. ये रोग संक्रमित पशुओं के संपर्क, मल-मूत्र, चारे या अन्य माध्यमों से फैल सकते हैं. इनके कारण दूध उत्पादन में कमी, पशुओं की कमजोरी और कई मामलों में मृत्यु तक हो सकती है. ऐसे में समय पर टीकाकरण पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है.

जिले में लाखों मवेशियों पर असर की आशंका

19वीं पशुगणना (2012) के अनुसार भोजपुर जिले में लगभग 1.95 लाख गाय और 1.99 लाख भैंस हैं. इतनी बड़ी पशुधन आबादी को देखते हुए समय पर टीकाकरण और रोग नियंत्रण कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. पशुपालकों का कहना है कि यदि टीकाकरण अभियान प्रभावी ढंग से नहीं चला तो आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है.

विभाग से बढ़ी अपेक्षाएं

पशुपालकों की मांग है कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर नि:शुल्क टीकाकरण अभियान चलाया जाए, पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराई जाएं और पशु चिकित्सकों की नियमित तैनाती सुनिश्चित हो. उनका कहना है कि इससे पशुधन सुरक्षित रहेगा और डेयरी एवं पशुपालन से जुड़ी आजीविका को मजबूती मिलेगी.

19 वीं पशुगणना 2012 के अनुसार अंचल तथा नगर निकायवार मवेशियों (गाय और भैंस) की संख्या की सूची:

अंचल / क्षेत्रगायभैंसकुल (गाय + भैंस)
अगिआंव11,19716,09427,291
बिहियां14,55112,79027,341
गड़हनी6,10411,76517,869
चरपोखरी4,9409,01613,956
सहार3,4876,63410,121
पीरो12,92322,94435,867
जगदीशपुर11,84115,36927,210
उदवंतनगर18,45719,00637,463
शाहपुर21,14611,62532,771
आरा सदर19,98811,40931,397
तरारी14,61126,27640,887
संदेश6,80210,38717,189
कोईलवर15,86112,49828,359
बड़हरा24,0429,76133,803
नगर पंचायत, पीरो9661,0031,969
नगर पंचायत, कोईलवर8935201,413
नगर पंचायत, बिहिया9225611,483
नगर पंचायत, शाहपुर1,2455221,767
आरा नगर निगम4,1239225,045
नगर पंचायत, जगदीशपुर1,3706071,977
कुल योग1,95,469

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