शीतलहर में शरीर की उष्मा को बनाये रखना जरूरी
Updated at : 22 Nov 2025 7:51 PM (IST)
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शीतलहर से खतरे व बचाव की दी गयी जानकारी
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पीरो.
मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत सुरक्षित शनिवार अभियान के क्रम में स्कूली बच्चों को शीतलहर से खतरे व बचाव की जानकारी दी गयी. सरकारी विद्यालयों में शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान फोकल शिक्षकों ने बताया कि सर्दी के मौसम में जब तापमान सात डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाये और इस दौरान तेज पछुआ हवा चले, तो इस स्थिति को शीतलहर माना जाता है. इसका शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. शीतलहर या ठंड लगने पर शरीर ठंडा और अंग सुन्न होने लगते हैं. कंपकपी या ठिठुरन महसूस होती है. जी मिचलाने तथा उल्टी होने लगता है. कभी कभी अर्द्ध बेहोशी या बेहोशी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. शीतलहर में सबसे आवश्यक है कि शरीर की उष्मा को बनाये रखा जाये. इस दौरान बाहर का तापमान काफी कम होने से शरीर का तापमान भी कम होने लगता है. ऐसी स्थिति में शरीर के तापमान का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है. इसके लिए अधिक-से-अधिक समय धूप का सेवन करना चाहिए. अनावश्यक घर से बाहर जाने से परहेज करना चाहिए. गर्म कपड़ों का उपयोग करना चाहिए. घर से बाहर निकलते समय कान, चेहरे, हाथ,पैर को उपयुक्त कपड़े से ढक कर रखना चाहिए. शरीर की उष्मा को बनाये रखने के लिए गर्म व पौष्टिक भोजन करना चाहिए. पर्याप्त पानी पीना चाहिए, ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जाये. खासकर बच्चों व बुजुर्ग लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए. सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के दौरान शीत लहर से बचाव से संबंधित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को जानकारी दी गयी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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