27 नक्षत्रों में जीवनदायी माना जाता है आर्द्रा नक्षत्र, 22 जून को सूर्य का होगा प्रवेश, बारिश के आसार प्रबल, जानिए डिटेल...

Edited by Nikhil Anurag
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आर्द्रा नक्षत्र

Ardra Nakshatra : आचार्य राकेश झा के अनुसार 22 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 6 जुलाई तक रहेंगे. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस अवधि में अच्छी बारिश के योग बन रहे हैं. आर्द्रा नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में जीवनदायी माना गया है और इसका कृषि, आरोग्यता व धार्मिक परंपराओं से विशेष संबंध है.

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Ardra Nakshatra : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश विशेष महत्व रखता है. इसे जीवन, ऊर्जा, आरोग्य और प्रकृति के नवजीवन से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा ने बताया कि सूर्य 22 जून की रात 8:27 बजे आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 6 जुलाई की रात 9:48 बजे तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इस अवधि को वर्षा, कृषि और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है.

जून के अंतिम सप्ताह में अच्छी वर्षा के बन रहे योग

आचार्य राकेश झा ने बताया कि सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में गोचर के साथ अच्छी वर्षा के संकेत बन रहे हैं. पंचांग गणना के अनुसार जून के अंतिम दिनों और जुलाई के शुरुआती सप्ताह में अच्छी बारिश होने की संभावना है. आर्द्रा से लेकर हस्त नक्षत्र तक की अवधि वर्षा के लिए अनुकूल मानी जाती है. यही समय कृषि गतिविधियों की शुरुआत के लिए भी महत्वपूर्ण होता है.

खीर, पूड़ी और आम का भोग लगाने की परंपरा

उन्होंने बताया कि आर्द्रा नक्षत्र के आरंभ होने पर सनातन धर्मावलंबी घरों में खीर, दाल वाली पूड़ी और आम का विशेष महत्व होता है. इनका भोग भगवान विष्णु को अर्पित कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में खीर का सेवन आरोग्यता प्रदान करता है और आम खाने की भी विशेष परंपरा है.

संतानों की आरोग्यता के लिए विशेष महत्व

पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए आचार्य झा ने कहा कि सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में रहने के दौरान महिलाएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना से खीर बनाकर खिलाती हैं. धार्मिक विश्वास है कि इस नक्षत्र में होने वाली वर्षा में स्नान करने से त्वचा संबंधी कई समस्याओं से राहत मिलती है.

27 नक्षत्रों में छठा और जीवनदायी नक्षत्र

आर्द्रा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में छठा नक्षत्र है. इसका स्वामी राहु माना जाता है और यह मिथुन राशि से संबंधित है. आचार्य झा के अनुसार वामन पुराण में आर्द्रा नक्षत्र को भगवान नारायण के केशों में निवास करने वाला बताया गया है. इसी कारण इसे जीवनदायी नक्षत्र की संज्ञा दी गई है. धरती को नमी प्रदान करने और कृषि कार्यों की शुरुआत का आधार बनने के कारण इसका विशेष महत्व माना जाता है.

कृषि के लिए अमृत तुल्य मानी जाती है आर्द्रा की वर्षा

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि भारत में मानसून की औपचारिक शुरुआत भी इसी कालखंड से मानी जाती है. आर्द्रा नक्षत्र में होने वाली वर्षा को किसानों के लिए अमृत तुल्य माना जाता है. इस बार सूर्य मिथुन राशि में गुरु के साथ युति करेंगे, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ संकेत माना जा रहा है.

शिव, विष्णु और सूर्य उपासना का विशेष महत्व

आचार्य राकेश झा के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठाता देव भगवान शिव के रुद्र स्वरूप हैं. इस अवधि में भगवान शिव, सूर्यदेव, भगवान विष्णु और इंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है. उन्होंने बताया कि “ॐ नमः शिवाय”, महामृत्युंजय मंत्र तथा विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करना, दान-पुण्य करना तथा गौ, ब्राह्मण और साधु-संतों की सेवा करना शुभ फलदायी माना जाता है. खीर, पूड़ी और आम का भोग अर्पित करना भी अत्यंत मंगलकारी माना गया है.

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Nikhil Anurag

लेखक के बारे में

By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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