खान सर मामले पर बोले डॉ. विवेक बिंद्रा, छात्र विवादों से दूर रहें, रौशन आनंद के परिवार के प्रति जताई संवेदना

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विवेक बिंद्रा की फाइल फोटो

Khan Sir Controversy : खान सर से जुड़े विवाद पर Bada Business के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. विवेक बिंद्रा ने संयम, निष्पक्षता और जिम्मेदार संवाद की अपील की है. उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है. साथ ही छात्रों से विवादों से प्रभावित हुए बिना अपने लक्ष्य और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखने का आग्रह किया.

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Khan Sir Controversy : खान सर को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही बहस के बीच Bada Business के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विवेक बिंद्रा ने संयम, निष्पक्षता और जिम्मेदार संवाद की अपील की है. उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में तथ्यों से पहले निष्कर्ष निकालना समाज और लोकतंत्र दोनों के लिए चिंताजनक प्रवृत्ति है.

तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर हो निर्णय

डॉ. विवेक बिंद्रा ने कहा कि वह पिछले कई दिनों से पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. उनके अनुसार जो मामला मूल रूप से शिक्षा जगत से जुड़े दो व्यक्तियों के बीच का था, वह अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है. उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले फैसले सुनाना उचित नहीं है. किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय तथ्यों, साक्ष्यों और संवैधानिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए, न कि धारणाओं और सोशल मीडिया ट्रेंड्स के आधार पर.

मीडिया और कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी पर दिया जोर

उन्होंने कहा कि मीडिया और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स समाज में जनमत निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सवाल पूछना पत्रकारिता का धर्म है, लेकिन बिना पूरी जानकारी के किसी को दोषी या निर्दोष घोषित कर देना जिम्मेदार संवाद नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि सत्य तक पहुंचने का रास्ता तथ्यों से होकर जाता है, न कि शोर-शराबे से.

रौशन आनंद के परिवार के प्रति जताई संवेदना

डॉ. बिंद्रा ने रौशन आनंद के भाई के नेपाल में हुए निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और संवेदनशील मामला है. उनकी संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में भावनाओं के साथ-साथ निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है, क्योंकि हर परिवार न्याय का हकदार है.

छात्रों से पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील

डॉ. बिंद्रा ने कहा कि इस तरह के विवादों का सबसे अधिक प्रभाव उन लाखों छात्रों पर पड़ता है जो शिक्षकों को अपना मार्गदर्शक मानते हैं. उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के विवाद या शोर-शराबे से प्रभावित हुए बिना अपनी पढ़ाई, लक्ष्य और भविष्य पर ध्यान केंद्रित रखें.

जिम्मेदार समाज की पहचान है निष्पक्षता

उन्होंने कहा कि खान सर को लेकर चल रही बहस केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मीडिया की जिम्मेदारी, शिक्षा जगत की गरिमा और सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाती है. उन्होंने कहा कि आरोपों को आरोपों की तरह, तथ्यों को तथ्यों की तरह और निर्णय को निर्णय की तरह देखने की आवश्यकता है. जांच से पहले फैसला सुनाने की संस्कृति से बचना ही एक जिम्मेदार समाज की पहचान है.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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