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घृति योग में छह जून को मनेगा वट सावित्री व्रत

Updated at : 02 Jun 2024 8:40 PM (IST)
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घृति योग में छह जून को मनेगा वट सावित्री व्रत

वट सावित्री को लेकर तैयारी पूरी

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शुभ संयोग में व्रत करने से मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदानप्रतिनिधि, अररिया

सनातन परंपरा में वट सावित्री व्रत का बहुत बड़ा महत्व है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत करने का विधान है. इस वर्ष 06 जून को वट सावित्री व्रत है. इस दिन विवाहित महिलाएं सुख व सौभाग्य में वृद्धि के लिए वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करती हैं. साथ ही व्रत-उपवास भी रखती हैं. इस व्रत के पुण्य प्रताप से पति की आयु लंबी होती है. नवविवाहित महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है. आचार्य पंडित शिवादित्य पांडे ने बताया कि अमावस्या तिथि का शुभारंभ 05 जून की संध्या 07:54 बजे से हो रहा है. अमावस्या तिथि का समापन छह जून की शाम 06:07 बजे हो रहा है. सनातन धर्म में जिस तिथि में सूर्योदय होता है. वहीं तिथि दिनभर मान्य होता है. उदया तिथि के मुताबिक वट सावित्री व्रत 06 जून को है. इस दिन घृति व शिववास नामक शुभ मंगलकारी योग बन रहा है. इस योग में पूजा-उपासना करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होती है. साथ ही सुख व सौभाग्य में भी वृद्धि होती है.

पति की दीर्घायु की कामना का है यह पर्व

सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु व परिवार की सुख-शांति के लिए वट सावित्री की पूजा करती हैं. पर्व में वट व सावित्री दोनों का खास महत्व माना गया है. पुराणों के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास होता है. व्रत में बरगद पेड़ के चारों ओर घूमकर रक्षा सूत्र बांधा आशीर्वाद मांगा जाता है. इस अवसर पर सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं. इसके अलावा पुजारी से सत्यवान व सावित्री की कथा सुनती हैं. नवविवाहित सुहागिनों में पहली बार वट सावित्री पूजा का अलग ही उत्साह रहता है. वट सावित्री में बरगद पेड़ के नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा सुनने से सुहागिन महिलाओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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