झमटा-महिषाकोल पुल के जांच को आज पहुंचेगी टीम, संवेदक व डिजाइनर आ सकते हैं कार्रवाई की जद में.

Published by : MRIGENDRA MANI SINGH Updated At : 22 May 2026 7:22 PM

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पुल की रेलिंग में आ चुकी है दरार, भारी वाहनों का आवागमन निषेद्य

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ग्रामीण कार्य प्रमंडल के चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम करेगी पुल की जांच

मृगेंद्र मणि सिंह, अररिया

अररिया जिले में पुलों के ताश के पत्तों की तरह ढहने व धंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला परमान नदी पर झमटा-महिषाकोल के बीच बना 206.72 मीटर लंबे व 7.32 करोड़ की लागत से बने पुल के पाया का धसने के बाद सामने आया है. हालांकि इस पुल के धसने के बाद आनन-फानन में फजीहत झेल रही ग्रामीण कार्य प्रमंडल ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है. ग्रामीण कार्य विभाग के चीफ इंजीनियर, स्टेट क्वालिटी मॉनिटर व ब्रीज सलाहकार अरुण कुमार मिश्रा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. ग्रामीण कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के अनुसार वे शनिवार को पुल की जांच करेंगे.

कार्य पर उठते रहें सवाल, तो फिर क्यूं नहीं हुई जांच

206.72 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य मई 2022 में हीं पूर्ण हुआ था, पुल अभी पूर्णरूपेण अनुरक्षण अवधि में भी है. लेकिन लोगों को हैरत इस बात की है, आखिर संवेदक, कनीय अभियंता, एसडीओ किस प्रकार से काम कराते हैं कि पुल अपनी निर्धारित समय सीमा तो दूर अनुरक्षण की अवधि भी नहीं पूरा कर पाती है. इससे पहले हीं पुल या तो धस जाती है या तास के पत्तों की तरह धराशायी हो जाती है. हालांकि प्रकाश कंस्ट्रक्शन के संवेदक दिनेश कुमार के कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे, बावजूद आखिर किस प्रकार से उनके कार्य को पूरा कर दिया गया.

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संवेदक व विभागीय कर्मी के अलावा पुल निर्माण करने वाले डिजाइनर भी दोषी

अररिया. ग्रामीण कार्य प्रमंडल के पुलों के धसने व तास के पत्तों की तरह ढहने के बाद अब तीनों पुलों के डिजाइन करने वाले डिजाइनर एजेंसी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. विभागीय सूत्रों की मानें तो बकरा नदी के पड़रिया घाट पर बना पुल का ढहना हो या, सांसद के गांव में कौआचाड़ जाने वाले पुल के धसने का मामला हो या झमटा-महिषाकोल में पुल के पाया धसने का मामला हो, इन सबका डिजाइन किसी एक एजेंसी द्वारा ही होने की बात कही जा रही है. हालांकि कौआचाड़ पुल के धसने के बाद पुल के डिजाइनर चेतन्या प्रोजेक्ट पर कार्रवाई की तलवार भी लटक गयी है. पुल धसने के पीछे की वजह को विभाग ने डिजाइन फेल्योर भी माना है व अररिया ग्रामीण कार्य प्रमंडल को उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया है, लेकिन अररिया ग्रामीण कार्य प्रमंडल द्वारा डिजाइनर के साथ एग्रीमेंट नहीं किया गया है, इसलिए वह एफआइआर करने की तकनिकी पचड़ों के कारण अभी तक एफआइआर नहीं कर पाया है. बहरहाल बातों को विभाग भी मान रही है कि पुल का धसना कहीं ना कहीं डिजाइनर की चुक हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि संवेदक, कनीय अभियंता व एसडीओ से लेकर विभागीय अधिकारी की गलती नहीं है.

पुल का चौथा पाया धसा व पुल के रेलिंग में आ चुकी है दरार, भारी वाहनों का आवागमन निषेद्य

झमटा-महिषाकोल पुल का चौथा पाया, जिसे तकनीकी शब्दों में पी तीन पायाें का धसना कहा जाता है, वह पूरी तरह से धसती जा रही है. उक्त पाया के धसने के कारण पुल के ऊपरी हिस्सों में ना केवल दरार आ गयी है बल्कि रेलिंग भी दरार की जद में है स्पष्ट दिख रहा है. हालांकि ग्रामीण कार्य प्रमंडल अररिया के द्वारा एहतियातन पुल पर भारी वाहनों के प्रवेश को वर्जित कर दिया गया है.

एक्सपर्ट व्यू

झमटा-महिषाकोल पुल के पाया के धसने की खबर जिले में सनसनी फैला चुकी है, लोग परेशान हैं कि लगातार अररिया में पुल या तो तास के पत्तों की तरह भर-भरा कर गिर जा रहे हैं तो या पुल का पाया हीं धस जा रहा है. लगातार तीन पुलों के धसने से ना केवल विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि अररिया को लूट का अड्डा मानने वाले संवेदक व विभागीय अधिकारियों की मिली भगत की पोल खुल कर सामने आ गयी है. हालांकि इस संबंध में पुल निर्माण से जुड़े इंजीनियर से पूछा गया तो उन्होंने यह बताया कि जब पुल के पाया के नीचे पायलिंग करने के बाद चबूतरा का निर्माण होता है तो उसमें मिट्टी या कंक्रीट को घेरने के लिए मजबूत जाली का इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन कभी-कभी इसी समय संवेदक या उसके कर्मी इसमें चूक कर देते हैं, जिसके कारण धीरे-धीरे चबूतरा के नीचे की मिट्टी बह जाती है व पुल का पाया सतह विहीन होने के कारण धस जाता है. हालांकि अभी पूर्णरूपेण बारिश का मौसम भी नहीं आया है, न ही बाढ़ जैसी स्थिति है, बावजूद पाया का धसना इंजीनियर को भी सकते में डाल रहा है.

तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, वे संभवत: शनिवार को अररिया में आकर झमटा-महिषाकोल पुल की जांच करेंगे, जांच के बाद संवेदक, एमबी बुक करने वाले कनीय अभियंता, एसडीओ या वरीय पदाधिकारी किसी पर भी कार्रवाई कर सकते हैं. ऐसे में जब तक जांच की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है तब तक कुछ बता पाना मुश्किल है.

चंद्रशेखर कुमार, कार्यपालक अभियंता, आरडब्ल्यूडी अररिया

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