समूह लॉन बन रहा है लोगों के लिए के जी का जंजाल, आत्महत्या करने व बच्चे को बेचने तक है लोग मजबूर

Updated at : 03 Nov 2024 10:08 PM (IST)
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समूह लॉन बन रहा है लोगों के लिए के जी का जंजाल, आत्महत्या करने व बच्चे को बेचने तक है लोग मजबूर

समूह लॉन ग्रामीण इलाके के महिलाओं के लिए जी का जंजाल बनने लगा है. समूह लॉन लेने के लिए कोई निर्धारित मापदंड नहीं होने के कारण फाइनेंस कर्मी औने-पौने करके गरीब-गुरबे को सिर्फ आधार पर लाखों का कर्ज दे देती है.

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परवाहा. समूह लॉन ग्रामीण इलाके के महिलाओं के लिए जी का जंजाल बनने लगा है. समूह लॉन लेने के लिए कोई निर्धारित मापदंड नहीं होने के कारण फाइनेंस कर्मी औने-पौने करके गरीब-गुरबे को सिर्फ आधार पर लाखों का कर्ज दे देती है. फाइनेंस कर्मी गांव घर में महिलाओं को सिर्फ आधार कार्ड पर कर्ज तो देती है, लेकिन कर्ज देने वाली महिलाओं का आय का स्रोत क्या है, इस चीज को नहीं देखते हैं. जिसका खामियाजा यह होता है, कि जबतक कर्ज लेने वाली महिलाओं के पास रुपये रहता है तब तक तो वह किसी तरह किश्त भर देती है. जैसे ही रुपये खत्म हो जाता है. किश्त देने में वह असमर्थ हो जाती है. फिर फाइनेंस कर्मी का किस्त के लिए प्रताड़ना की कहानी की शुरुआत हो जाती है. फिर किश्त के लिए उन महिला के घर वसूलीकर्ता एजेंट का सुबह शाम आने का फिर प्रताड़ित करने का दौर शुरू हो जाता है. सूत्रों की मानें तो कुछ महिला जो समूह लॉन लिया है, लेकिन चुका पाने में असमर्थ है वैसी महिला ससुराल छोड़कर मायके या फिर अन्य जगह पलायन कर गयी है. ऐसे में समूह लॉन देने वाले फाइनेंस पर तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि जिनका आय का कोई स्रोत नहीं है फिर भी उसे सिर्फ आधार कार्ड का एक छायाप्रति पर ही निजी फाइनेंस कैसे और क्यों लाखों रुपये कर्ज दे देती है. यदि बिना आय का स्रोत जाने निजी फाइनेंस सिर्फ एक आधार का छायाप्रति पर लाखों रुपये कर्ज देती है तो निश्चित फाइनेंस कंपनी दोषी है. ऐसे में फाइनेंस कंपनी को चाहिए कि लोगों को कर्ज देने के लिए एक मापदंड तय करे फिर वैसे लोगों को चिह्नित करके कर्ज दे, जो कर्ज भुगतान कर सके. ताकि आये दिन महिलाएं कर्ज चुकाने के कारण खुद आत्महत्या न करें न ही कर्ज चुकाने के लिए छोटे बच्चे को बेचने का काम करें. साइबर फ्रॉड के शिकार पीड़ित के खाते से उड़ाये गये 3.35 लाख रुपये कराये वापस अररिया. अररिया साइबर थाना पुलिस द्वारा साइबर फ्रॉड के शिकार पीड़ित व्यक्ति के खाते से गायब लाखों रुपये की राशि को वापस कराया गया है. इसकी जानकारी देते मुख्यालय डीएसपी फखरे आलम ने बताया कि पीड़ित के खाता संख्या 30509240038107 से 03 लाख 35 हजार रुपये राशि की धोखाधड़ी करते हुए साइबर फ्रॉड कर लिया गया था. इसकी सूचना आवेदन द्वारा प्राप्त हुई. जिसमें कार्रवाई करते हुए साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए वादी के खाते से ठगी की गयी 3.35 लाख रुपये की राशि में त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित के खाते में फ्रॉड की गयी राशि को वापस कराया गया है. इसको लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से एसपी अमित रंजन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि किसी भी तरह के साइबर अपराध होने पर एनसीसीआरपी पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ अथवा डायल 1930 या अपने नजदीकी साइबर थाना के हेल्पलाइन नंबर में संपर्क करें.

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