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उद्घाटन से पहले ही नदी के गर्भ में समाया पुल

कुर्साकांटा व सिकटी के बीच डोमरा बांध सड़क पर 23 जून 2021 में शुरू हुआ पुल अपने तीन वर्ष के अवधि को पूरा करने से पूर्व ही बकरा नदी के गर्भ में समा गया.

मृगेंद्र मणि सिंह, अररिया. कुर्साकांटा व सिकटी के बीच डोमरा बांध सड़क पर 23 जून 2021 में शुरू हुआ पुल अपने तीन वर्ष के अवधि को पूरा करने से पूर्व ही बकरा नदी के गर्भ में समा गया. 07 करोड़ 79 लाख 60 हजार रुपये की लागत से निर्माणाधीन पुल के दो पाये मंगलवार को नदी में भरा-भरा कर गिर गये, वहीं पुल का तीसरा पाया भी दबाव नहीं सह पाया व नदी के गर्भ में समा गया. बारिश के कारण पुल निर्माण कार्य में लगे मजदूर दूर थे, नहीं तो जानमाल की क्षति भी हो सकती थी. इसकी जानकारी सबसे पहले ग्रामीणों को हुई. पुल के ध्वस्त होने का दृश्य स्थानीय लोगों ने मोबाइल में कैद कर लिया. इसके बाद मीडिया में खबर आयी. जानकारी के मुताबिक यह पुल तीरा व कौआकोह गांव के बीच बन रहा है, लेकिन पुल के निर्माण के बाद से ही पाया की मिट्टी नदी में छोड़ दिये जाने के कारण नदी का बहाव मार्ग बाधित होने लगा था, जिस कारण नदी का पानी पुल को छोड़कर उससे दूर जा निकल गया. इसके बाद नदी के कटाव का डर ग्रामीणों को समाने लगा, इसलिए ग्रामीण सांसद व विधायक से पहले नदी के दोनों तरफ बोल्डर पिचिंग कराने की मांग कर रहे थे. इसके बाद सिकटी विधायक विजय कुमार मंडल के नेतृत्व में आरडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता अंजनी कुमार पड़रिया पहुंचे थे और जल्द ही ग्रामीणों को बोल्डर पिचिंग का आश्वासन दिया था. इस बीच पुल ही नदी के गर्भ में समा गया. अब ग्रामीणों को बाढ़ का डर भी सता रहा है. इस पुल के पूर्व वर्ष 2012 में सात स्पैन दो चरणों में लगभग 20 करोड़ की लागत से बन चुका है, लेकिन नदी के रास्ता बदल लेने के कारण आज तक वह पुल हवा में ही तैर रहा है. वहीं अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह कहा कि पुल का तीन पाया धंस गया, तो चिंता बढ़ गयी है. दोषी संवेदक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, इसके अलावा अब जिले में बन रहे सभी बड़े पुलों की भी जांच करायी जायेगी. पूर्व राज्यमंत्री सह सिकटी विधायक विजय कुमार मंंडल ने कहा कि पुल बह गया है. उन्होंने विभागीय कर्मी व संवेदक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विधि सम्मत कार्रवाई की मांग की है. संवेदक से पूछा गया है स्पष्टीकरण सात करोड़ की लागत से 09 स्पैन का पुल बन रहा था. जिसका दो पाया नदी में तो तीसरा पाया ध्वस्त होने की जानकारी मिली है. संवेदक को लगभग 05 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है. बावजूद पुल नहीं बनाया गया. संवेदक से पुल के पाया के धंसने को लेकर स्पष्टीकरण पूछा गया है, इसके बाद निर्माण कार्य को भी उन्हें ही पूरा करना है, अगर पुल का निर्माण कार्य को लेकर वे संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनके दस्तावेज को जब्त करते हुए उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. -आशुतोष रंजन, कार्यपालक अभियंता आरडब्ल्यूडी, अररिया

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