इमरजेंसी के बाद पड़ोसी देश नेपाल का अस्पताल ही था सहारा

Updated at : 18 Jun 2019 7:42 AM (IST)
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इमरजेंसी के बाद पड़ोसी देश नेपाल का अस्पताल ही था सहारा

फारबिसगंज : अनुमंडलीय अस्पताल में ओपीडी सेवा पूर्णतः बंद रहने के कारण अनुमंडलीय अस्पताल में इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद सीरियस रोगियों के लिए सोमवार के दिन पड़ोसी देश नेपाल के विराट नगर स्थित अस्पताल का ही सहारा लेना पड़ा. सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने व हृदय रोग सहित सांस की […]

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फारबिसगंज : अनुमंडलीय अस्पताल में ओपीडी सेवा पूर्णतः बंद रहने के कारण अनुमंडलीय अस्पताल में इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद सीरियस रोगियों के लिए सोमवार के दिन पड़ोसी देश नेपाल के विराट नगर स्थित अस्पताल का ही सहारा लेना पड़ा. सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने व हृदय रोग सहित सांस की बीमारियों से गंभीर रूप से बीमार लोगों का यूं तो अनुमंडलीय अस्पताल में मौजूद सरकारी व सेवा दे रहे निजी चिकित्सकों में प्राथमिक उपचार तो किया मगर कई ऐसे रोगी जिसकी हालात नाजुक थी, उन्हें रेफर करने पर उनके परिजन पूर्णिया व अन्य जगह न ले जाकर सीधे नेपाल के लिए रवाना होते दिखे.
गंभीर रूप से बीमार ढोलबज्जा निवासी 60 वर्षीय किशुन मंडल पिता तिनकौरी मंडल, बेचन पासवान, मो मुमताज सहित आधा दर्जन से अधिक रोगियों ने बताया कि इमरजेंसी में उनलोगों का इलाज तो हुआ, लेकिन अधिक बीमार होने के कारण चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर किया.
सभी जगह हड़ताल होने के कारण उन लोगों को बेहतर इलाज के लिए सीमा पार पड़ोसी देश नेपाल के अस्पतालों में ही जाना आज मजबूरी बन गया है. नरपतगंज से प्रतिनिधि के अनुसार अपनी मांगों के समर्थन में सोमवार को चिकित्सक हड़ताल पर रहे. इस कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ओपीडी सेवा पूरी तरह बाधित रही. इस दौरान दूर दराज से इलाज के लिए आये मरीजों को परेशान होना पड़ा.
प्रखंड क्षेत्र की मधुरा दक्षिण पंचायत के वार्ड आठ निवासी कुंजीलाल पासवान पिता रामकिशन पासवान इलाज के लिए सोमवार को अस्पताल पहुंचे. ओपीडी बंद देख उन्हें लौटना पड़ा. जबकि बीमारी के कारण पड़ोस के 15 वर्षीय किशोर चंदन पासवान ने खुद ठेला चलाकर अस्पताल पहुंचाया. इसको लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विपिन कुमार ने बताया कि हड़ताल के कारण ओपीडी सेवा बंद की गयी थी. जबकि अस्पताल में इमरजेंसी सेवा जारी थी. ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक इमरजेंसी के मरीजों का इलाज कर रहे थे.
आपात स्थिति से निबटने के लिए जीवन रक्षक दवा के साथ चिकित्सक थे तैनात
फारबिसगंज. चिकित्सकों की हड़ताल का फारबिसगंज में खासा असर रहा. अनुमंडल क्षेत्र में भी सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सक चिकित्सक हड़ताल पर रहते हुए अपने निजी क्लिनिकों में ताला लगाकर चिकित्सीय सेवा से खुद को अलग रखा. वहीं अनुमंडलीय अस्पताल और प्राथमिक व अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में भी चिकित्सक हड़ताल पर रहे. पूर्व से ही अनुमंडलीय अस्पताल प्रबंधक विकास आनंद ने अस्पताल में आपात स्थिति से निबटने के लिए इमरजेंसी वार्ड व ड्रेसिंग कक्ष में इमरजेंसी जीवन रक्षक दवा व चिकित्सकों को तैनात रखा था. अस्पताल में केवल आकस्मिक स्वास्थ्य सेवा बहाल रही.
हड़ताल के क्रम में अस्पताल में इमरजेंसी में इलाज कराने के लिए आने वाले रोगियों को बेहतर चिकिसीय सेवा उपलब्ध कराने के लिए अनुमण्डलीय अस्पताल उपाधीक्षक डॉ आशुतोष कुमार, डॉ एनएल दास, डॉ मनीष कुमार अग्रहरी, डॉ शिला कुंवर, डॉ राजीव कुमार बसाक, डॉ सरबजीत निरंजन के अलावा निजी क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सकों में जिला वीवीडी पदाधिकारी दो अजय कुमार सिंह, एसीएमओ डॉ एमपी गुप्ता, डॉ मो अतहर, डॉ तरुण कुमार सिंह, डॉ बिनोद मिश्रा व डॉ संजीव कुमार यादव सहित अन्य निजी चिकित्सकों ने एक दिवसीय बंदी को सफल बनाने के लिए सोमवार के सुबह में अपने क्लीनिक बंद रख अनुमंडलीय अस्पताल में अपनी सेवा दी.
निजी किलिनिक के सामने भटकते रहे मरीज
शहर के करीब दो दर्जन चिकित्सकों के निजी क्लिनिकों व नर्सिंग होम में भी बंदी का असर देखा गया. सरकार से चिकित्सकों को सुरक्षा मुहैया कराने व चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार व मारपीट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे. बंदी में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ मो अतहर, डॉ उमेशचंद्र मंडल, एमपी गुप्ता, डॉ मानव महेश ठाकुर, डॉ निर्मल कुमार, डॉ संजीव कुमार, डॉ पीके केसरी, डॉ तरुण कुमार, डॉ रेशमा अली, डॉ आशुतोष कुमार, अलख बाबू के अस्पताल में डॉ सरबजीत निरंजन, डॉ मनोज निरंजन, डॉ केएन मिश्रा, डॉ तरुण कुमार सिंह, डॉ विनोद मिश्रा, डॉ निर्मल कुमार झा, डॉ हलधर प्रसाद, डॉ सीताराम साह, डॉ मंटू ठाकुर, डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ केएन सिंह व डॉ एके झा ने नर्सिंग होम पूर्णत बंद रहे.
ग्रामीण चिकित्सक को दिखाकर मरीजों ने दवा ली
कुर्साकांटा : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुर्साकांटा का ओपीडी सोमवार को मेडिकल यूनियन के आह्वान पर सोमवार को बंद रहा. जिससे प्रखंड क्षेत्र के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से इलाज कराने आये मरीज को बगैर इलाज के बैरंग वापस होना पड़ा. प्राप्त जानकारी अनुसार पश्चिम बंगाल में गत दिनों हुये डॉक्टरों के साथ मारपीट व अभद्र व्यवहार को लेकर पहले पश्चिम बंगाल में फिर सम्पूर्ण भारत में अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संघ के आह्वान पर ओपीडी बंद रहा.
ओपीडी बंद को लेकर मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. मरीज थक हार कर मरीजों को ग्रामीण चिकित्सक को दिखाकर दवाई ली और घर वापस चले गये. सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार ओपीडी बंद को लेकर सोमवार को सैकड़ों मरीज अस्पताल से वापस गये.
इधर डॉक्टरों के हड़ताल को लेकर ग्रामीण क्षेत्र से आये मरीज यह कहते सुने गये कि मरीज व उनके परिजन टेंपू व अन्य संसाधन से पीएचसी पहुंचे. लेकिन ओपीडी बंद होने के कारण मरीजों का इलाज नहीं हो सका. पीएचसी का ओपीडी बंद होने के लेकर वापस जा रहे मरीज ने बताया कि अस्पताल बंद की सूचना पूर्व में देनी चाहिये थी.
जिससे मरीज को इतना परेशानी का सामना नहीं कड़ना पड़ता. अस्पताल की बंदी को लेकर गरीब तबके के लोग जो बगैर रुपये के भी अस्पताल आये यह सोचकर कि अस्पताल में तो निःशुल्क इलाज होता है. लेकिन ओपीडी बंद होने को लेकर पॉकेट रुपया नहीं होने के कारण घर वापस गये की चलो किसी तरह आज का दिन कट जाये कल लाकर दिखायेंगे.
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