मक्का सुखाने का 'खलिहान' बनी सीमा सड़क, राहगीरों की जान आफत में, प्रशासन मूकदर्शक
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 19 May 2026 3:41 PM
सीमा सड़क पर फैला मक्का
अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में भारत-नेपाल सीमा सड़क इन दिनों मक्का उत्पादक किसानों के लिए खलिहान में तब्दील हो चुकी है. सड़क के बड़े हिस्से पर फैलाए गए मक्के के कारण आए दिन बाइक सवार और राहगीर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या पर मूकदर्शक बना हुआ है.
अररिया के सिकटी से संजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट:
9 से 10 किलोमीटर तक सड़क पर फैलाया मक्का, हादसों का सबब
प्रखंड मुख्यालय सिकटी से लेकर बकरा नदी पुल तक जाने वाली मुख्य सीमा सड़क (बॉर्डर रोड) पर इन दिनों पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है. मक्के के इस सीजन में लगभग 9 से 10 किलोमीटर की दूरी तक सड़क के एक बड़े हिस्से पर किसानों द्वारा मक्का सुखाने के लिए फैला दिया गया है. इसके चलते सड़क काफी संकरी हो गई है. दोपहिया, चारपहिया और बड़े भारी वाहनों को यहाँ से गुजरने और एक-दूसरे को साइड देने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति इतनी भयावह है कि पूरे साल में जितने सड़क हादसे इस क्षेत्र में नहीं होते, उतने अकेले मक्के के इस सीजन में दर्ज हो रहे हैं. दुपहिया वाहनों के मक्के पर फिसलने और राहगीरों के वाहनों की चपेट में आने की घटनाएं यहाँ आम बात हो चुकी हैं.
निजी खलिहान न होना मजबूरी: किसान
सड़क किनारे बसे गांवों और टोलों के किसान मधुरी मंडल, मो. सुलेमान, अब कासिम, दौलत राम, किशन मंडल और रोनित राय सहित दर्जनों किसानों ने अपनी समस्या साझा की. किसानों का कहना है कि उनके पास अपनी बहुत कम जमीन है, और वे दूसरों की जमीन बटाई या ठेके पर लेकर मक्के की खेती करते हैं. फसलों की दौनी के बाद उनके पास अनाज सुखाने के लिए कोई निजी खलिहान उपलब्ध नहीं है. सरकारी स्तर पर भी सुखाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते मुख्य सीमा सड़क और ग्रामीण सड़कों पर मक्का सुखाना उनकी मजबूरी बन गया है. किसानों का सवाल है कि अगर वे सड़क पर फसल नहीं सुखाएंगे, तो कहाँ जाएंगे.
प्रशासन और एसएसबी की गाड़ियां गुजरती हैं, पर सब मौन
इस अव्यवस्था के बीच सबसे हैरान करने वाली बात स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही है. इस मुख्य सीमा सड़क से प्रतिदिन स्थानीय अंचल, पुलिस प्रशासन और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की गाड़ियां और पेट्रोलिंग पार्टियां लगातार गुजरती हैं. इसके बावजूद अधिकारी इस समस्या से आंखें मूंदकर निकल जाते हैं. जब इस संबंध में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक शब्द में कहा कि “ऊपर से ऐसा कोई लिखित आदेश नहीं है, और बिना किसी बड़े आदेश के हम कोई दंडात्मक कदम नहीं उठा सकते.”
ग्रामीण सड़कों के हालात और भी ज्यादा बदतर
मुख्य बॉर्डर रोड के अलावा ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली संपर्क सड़कों के हालात और भी ज्यादा चिंताजनक हैं. किसानों की मजबूरी और प्रशासन की उदासीनता के बीच आम जनता और राहगीर पीस रहे हैं. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि किसानों को फसल सुखाने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान दिया जाए और मुख्य सड़कों को तत्काल खाली कराया जाए ताकि असमय होने वाले सड़क हादसों पर रोक लगाई जा सके और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
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