जनता दरबार में हुई 33 मामलों की सुनवाई, जिलाधिकारी ने शिकायतों के समयबद्ध एवं निष्पक्ष निष्पादन के दिए निर्देश

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 19 May 2026 11:45 AM

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जनता दरबार में लोगों की शिकायतें सुनते जिलाधिकारी

अररिया समाहरणालय के परमान सभागार में आयोजित जिलाधिकारी के जनता दरबार में कुल 33 मामलों की सुनवाई की गई. डीएम ने जमीन पर अवैध कब्जे, फर्जी म्यूटेशन और भरण-पोषण जैसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को समयबद्ध जांच के निर्देश दिए हैं.

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अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट. जिला प्रशासन आम लोगों की समस्याओं और जन-शिकायतों के प्राथमिकता के आधार पर समाधान को लेकर पूरी तरह गंभीर है. इसी कड़ी में नियमित अंतराल पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनता दरबार का आयोजन किया जा रहा है. समाहरणालय स्थित परमान सभागार में आयोजित इस बार के जनता दरबार में कुल 33 फरियादियों ने उपस्थित होकर अपनी-अपनी शिकायतें और आवेदन जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए. सभी मामलों को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से सुनते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को शिकायतों के निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध (त्वरित) निष्पादन का कड़ा आदेश दिया.

जमीन कब्जे से लेकर पारिवारिक भरण-पोषण तक के आए मामले

जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों और सुदूर ग्रामीण इलाकों से पहुंचे लोगों ने अपनी प्रशासनिक व व्यक्तिगत समस्याएं रखीं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मामले छाए रहे:

  • पारिवारिक विवाद: सुकुमारी देवी ने अपने परिजनों के खिलाफ भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) न मिलने से संबंधित भावुक आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई.
  • फर्जीवाड़ा: जाबिर हुसैन नामक फरियादी ने भू-राजस्व विभाग से जुड़ी एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुछ भू-माफियाओं द्वारा फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का सहारा लेकर जमीन का अवैध म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) करा लिया गया है.
  • अवैध कब्जा: वहीं, मंजूर आलम ने अपनी पैतृक व निजी जमीन पर असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए अवैध दखल-कब्जे से संबंधित शिकायत जिलाधिकारी के सामने रखी और सुरक्षा की मांग की.

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को डीएम की चेतावनी

जिलाधिकारी ने मौके पर ही इन सभी आवेदनों को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराते हुए संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ), थाना अध्यक्ष और अनुमंडल पदाधिकारियों को अग्रसारित कर दिया. जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि जन-शिकायतों के निवारण में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खुद मौके पर जाकर (भौतिक सत्यापन कर) दोनों पक्षों की बात सुनें और कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष तरीके से मामलों का निपटारा करें, ताकि आम जनता को बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें.

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