योजनाओं का चयन के बाद भी नहीं हो पाता है क्रियान्वयन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jun 2019 7:47 AM
अररिया : यह जानना बेहद जरूरी है कि एक योजना को जमीन पर उतारने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है. बावजूद वह योजना अगर नप प्रशासन के शिथिलता के कारण जमीन पर नहीं उतर पाये तो इसका कष्ट न केवल वहां रहने वाले स्थानीय लोगों को उठाना पड़ता है बल्कि उक्त योजना को जमीन […]
अररिया : यह जानना बेहद जरूरी है कि एक योजना को जमीन पर उतारने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है. बावजूद वह योजना अगर नप प्रशासन के शिथिलता के कारण जमीन पर नहीं उतर पाये तो इसका कष्ट न केवल वहां रहने वाले स्थानीय लोगों को उठाना पड़ता है बल्कि उक्त योजना को जमीन पर उतारने का सपना देखने वाले प्रतिनिधि भी खासे दु:खी होते हैं. ऐसी ही स्थिति अब अररिया नप की है. यहां नवंबर 2018 में ही दो एनआईटी के प्रकाशन से 3.79 करोड़ की सात योजनाएं के निविदा में संवेदकों ने भाग लिया.
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