पेयजल को ले करोड़ों खर्च, शहर की 75 हजार आबादी फिर भी प्यासी

Updated at : 30 Apr 2019 7:59 AM (IST)
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पेयजल को ले करोड़ों खर्च, शहर की 75 हजार आबादी फिर भी प्यासी

अररिया : शुद्ध पेयजल के नाम पर करोड़ों खर्च करने का दावा नप प्रशासन करता आया है, वहीं पीएचईडी भी शुद्ध पेयजल के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करता है. लेकिन हकीकत इससे काफी परे है. शहर के 75 हजार की आबादी को एक बूंद भी शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं हो पा रहा है. तो […]

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अररिया : शुद्ध पेयजल के नाम पर करोड़ों खर्च करने का दावा नप प्रशासन करता आया है, वहीं पीएचईडी भी शुद्ध पेयजल के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करता है. लेकिन हकीकत इससे काफी परे है. शहर के 75 हजार की आबादी को एक बूंद भी शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं हो पा रहा है.

तो फिर नप प्रशासन और पीएचईडी की ओर से ये राशि खर्च करने का क्या फायदा. सूत्रों की मानें तो 24.59 करोड़ रुपये नप प्रशासन ने कार्यकारी एजेंसी बीआरजीपी को शहर के 10 हजार परिवारों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए दिया था.
बीआरजीपी के कार्यकारी एजेंसी के द्वारा काम तो किया गया, लेकिन उसके ऊपर अनियमितता के भी आरोप लगते रहे हैं. तत्कालीन डीएम हिमांशु शर्मा के द्वारा जांच भी की गयी, लेकिन कार्रवाई क्या हुई यह आज भी अनसुलझी पहेली बनी हुई है.
तुर्रा तो यह कि उक्त कार्यकारी एजेंसी के द्वारा जैसे-तैसे काम खत्म कर नप से एनओसी भी ले ली गयी. हालांकि नप बोर्ड की बैठक में उक्त एजेंसी की अनियमितता पर कई बार प्रस्ताव भी लिया गया. नगर विकास विभाग को लिखकर भी भेजा गया, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं.
जानकारों की मानें तो कार्यकारी एजेंसी के द्वारा 3519 परिवारों को शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया. जब प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने जमीन पर इसकी पड़ताल की तो हकीकत यह सामने आयी कि लगाये गये नलों में या तो शुद्ध पानी नहीं पहुंच पा रहा है या फिर वह नल बेजान वस्तु बनी पड़ी है. आलम यह है कि नलों से पानी नहीं निकल रहा तो कहीं टोटी के अभाव में हजारों लीटर पानी रोज सड़कों व नालों में बर्बाद हो रहा है.
हालांकि विभागीय दावा है कि लोगों को दिन में तीन बार पानी मुहैया कराया जाता है. सुबह छह से दस, दोपहर 12 से दो और शाम चार से सात बजे तक विभाग पानी मुहैया कराता है. अगर स्थानीय लोगों की मानें तो हकीकत में नलों में कभी-कभी तो पानी आता ही नहीं या आता भी है तो महज दो बार. जबकि नल भी कुछेक वार्डों में लगाया गया है, अधिकांश में तो नल लगाये भी नहीं गये हैं.
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