1972 के चुनाव में फणीश्वर नाथ रेणु ने भी आजमायी थी किस्म
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Mar 2019 5:52 AM
परवेज आलम, अररिया : लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कौन कब चुनावी समर में कूदने का निर्णय ले ले, कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही मामला कालजयी रचनाकार फणीश्वर नाथ रेणु के साथ भी हुआ था. हिंदी साहित्य में अपनी खास पहचान बना चुके रेणु ने वर्ष 1972 में चुनाव लड़ने का फैसला लेकर […]
परवेज आलम, अररिया : लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कौन कब चुनावी समर में कूदने का निर्णय ले ले, कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही मामला कालजयी रचनाकार फणीश्वर नाथ रेणु के साथ भी हुआ था. हिंदी साहित्य में अपनी खास पहचान बना चुके रेणु ने वर्ष 1972 में चुनाव लड़ने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया था. हालांकि साहित्यकार के साथ-साथ उनकी एक पहचान सोशलिस्ट विचारधारा के कारण भी थी. यही नहीं बल्कि राजशाही के खिलाफ नेपाल क्रांति में उनका अहम योगदान भी रहा था.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










