जमशेदपुर से निकल रहे स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग के खिलाड़ी, आठ केंद्रों पर 500 बच्चों को दी जा रही मुफ्त ट्रेनिंग

Updated at : 18 Jan 2025 10:36 PM (IST)
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बच्चों को स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग की ट्रेनिंग देते कोच

बच्चों को स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग की ट्रेनिंग देते कोच

जमशेदपुर में स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग के खिलाड़ी तैयार किए जा रहे हैं. आठ केंद्रों पर 500 बच्चों को नि:शुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है.

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जमशेदपुर, निसार-स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग. झारखंड के प्राकृतिक और भौगोलिक स्वरूप के अनुरूप खेले जाने वाले इस खेल की संभावनाओं को देखते हुए टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (टीएसएएफ) ने कोल्हान में इसे विकसित करने का फैसला किया है. इसके लिए जमशेदपुर और आसपास के आठ स्थानों पर क्लाइंबिंग वॉल लगाया है, जहां बच्चों को नि:शुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है. इन केंद्रों पर इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (आइएमएफ) मानक के वॉल लगाये गये हैं. इसकी ऊंचाई 13 फीट है. फाउंडेशन ने यहां प्रशिक्षक भी नियुक्त किये हैं. इन केंद्रों में छह साल से 18 वर्ष आयु वर्ग के 500 बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है. प्रत्येक सेंटर पर 60 बच्चों को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था है. ट्रेनिंग सुबह और शाम 90-90 मिनट की होती है. यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किये जा रहे हैं, जो भविष्य में देश का नाम रोशन करेंगे.

ओलिंपिक में होते हैं तीन इवेंट्स


स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण खेल है, ओलिंपिक में शामिल इस खेल में तीन इवेंट्स होते हैं. एक 15 मीटर वॉल पर स्पीड और दूसरा लीड क्लाइंबिंग. तीसरा बोल्डरिंग वॉल पर बोल्डरिंग इवेंट. इन इवेंट में क्लाइंबर अपने बॉडी वेट का इस्तेमाल करके ऊपर की ओर चढ़ता है.

यहां खोले गये हैं सेंटर


पीपला, तुमुंग, डिमना बाबूडीह, परसुडीह, कदमा बाजार के समीप, राजनगर, और टिनप्लेट में सेंटर खोले गये हैं, जहां क्लाइंबिंग वॉल लगाये गये हैं. इसके अलावा शहर के स्कूलों में सप्ताह भर के लिए टेंपेररी क्लाइंबिंग वॉल लगाये जाते हैं, जिससे बच्चे इस खेल को समझ सकें.

ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं अंतरराष्ट्रीय क्लाइंबर


टीएसएएफ की ओर से चलाये जा रहे इस प्रोजेक्ट के तहत अभी तक कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभर कर सामने आये हैं. इन खिलाड़ियों में सावित्री, नंदनी, भोज बिरुआ, जोगा पूर्ति, किरण, हरप्रीत और रौनित बानरा के नाम शामिल हैं. इसके अलावा कई क्लाइंबर राष्ट्रीय टूर्नामेंट में अच्छा कर रहे हैं.

टीएसएएफ रखता है सेफ्टी का पूरा ख्याल


फाउंडेशन ने जहां-जहां क्लाइंबिंग वॉल लगाये हैं, वहां पर खिलाड़ियों की सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा जाता है. बच्चों को हार्नेस, रोप और चॉक पाउडर मुहैया करायी जाती है. ये सभी उपकरण काफी मंहगे हैं. हार्नेस की कीमत 3500 से 5000 रुपये से शुरू होती है. ट्रेनिंग में उपयोग के बाद खिलाड़ियों से ये सामान वापस ले लिये जाते हैं.

2020 तोक्यो ओलिंपिक में किया गया शामिल


अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक कमेटी ने स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग को 2020 तोक्यो ओलिंपिक में पहली बार जगह दी. इसके बाद से भारत में इस खेल का विकास धीरे-धीरे हो रहा है. लेकिन टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन इसे लेकर काफी संजीदा है. इसे बढ़ावा देने के लिए टीएसएएफ ने देश में पहली क्लाइंबिंग एकेडमी स्थापित की.

कोल्हान की उभरती खिलाड़ी हैं घाटशिला की सावित्री


स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग में कोल्हान से सबसे प्रतिभावान खिलाड़ी सावित्री सामद हैं. घाटशिला निवासी सावित्री पीपल के टीएसएएफ केंद्र में अभ्यास करती हैं. वर्ष 2021 में वह पहली बार इस केंद्र में ट्रेनिंग के लिए पहुंची थीं. कड़ी मेहनत की बदौलत वह अभ तक जूनियर, सब जूनियर और यूथ जूनियर में पदक जीत चुकी हैं. एशियन यूथ और एशियन किड्स जैसे इंटरनेशनल टूर्नामेंट में खेल चुकी सावित्री ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं. सावित्री के पिता सतारी सामड किसानी करते हैं और माता सनता सामड गृहिणी हैं. माता-पिता मुश्किल से परिवार चला पाते हैं, लेकिन बेटी के सपनों को उड़ान देना चाहते हैं, जिसमें टीएसएएफ मदद कर रहा है.

ओलिंपिक में पदक जीतना है लक्ष्य : बछेंद्री पाल


टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की पूर्व प्रमुख और मार्गदर्शक बछेंद्री पाल ने बताया कि ओलिंपिक को ध्यान में रखते हुए स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग को पूरे क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. भारत में यह खेल 90 में ही आ गया था, लेकिन लोग इसे लेकर उतने गंभीर नहीं हैं. लेकिन जब से यह खेल ओलिंपिक में शामिल किया गया है, तब से संस्थाएं गंभीर हुई हैं. कई जगहों पर इस खेल के खिलाड़ी को नौकरी भी दी जा रही है, जिसमें डिफेंस सेक्टर प्रमुख है.

ग्रास रूट विकसित करना उद्देश्य : हेमंत गुप्ता


फाउंडेशन के प्रमुख हेमंत गुप्ता ने बताया कि भारत में इस खेल को लेकर उतनी जागरूकता नहीं है. इसलिए लोगों को इससे जोड़ना कठिन है. लोगों को जोड़ने और ग्रास रूट को मजबूत करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में क्लाइंबिंग वॉल लगाये हैं. इसके अलावा जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है. यहां पर भारत का सबसे बड़ा 13 फीट चौड़ा बोल्डरिंग वॉल और 15 फीट ऊंचा क्लाइंबिंग वॉल है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे इतने दूर नहीं आ पाते हैं. इसलिए हम स्काउटिंग के जरिये ग्रामीण इलाकों से अच्छे खिलाड़ियों को चुनकर जेआरडी कॉम्प्लेक्स में लाते हैं और एडवांस ट्रेनिंग देते हैं.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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