आईओसी ने आरोपपत्र मामले में आईओए का समझौता फार्मूला नामंजूर किया

Published at :06 Sep 2013 11:25 AM (IST)
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आईओसी ने आरोपपत्र मामले में आईओए का समझौता फार्मूला नामंजूर किया

नयी दिल्ली : भारत का ओलंपिक में लौटने का इंतजार बढ़ गया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) अपनी आरोपपत्र संबंधी शर्त पर कायम है जबकि भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अपना विरोधी रवैया बरकरार रखते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में भारतीय कानून अहम होता है.आईओए ने पिछले महीने विशेष आम सभा […]

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नयी दिल्ली : भारत का ओलंपिक में लौटने का इंतजार बढ़ गया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) अपनी आरोपपत्र संबंधी शर्त पर कायम है जबकि भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अपना विरोधी रवैया बरकरार रखते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में भारतीय कानून अहम होता है.आईओए ने पिछले महीने विशेष आम सभा की बैठक में आईओसी के सामने समझौता फार्मूला पेश किया जिसमें आरोपी व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की छूट देने के लिये कहा गया था. आईओए के प्रस्ताव के अनुसार यह नियम उन्हीं अधिकारियों पर लागू होना चाहिए जिन्हें दो साल से अधिक की जेल की सजा मिली हो.

लेकिन आईओसी अपने रवैये पर कायम है. उसने 125वें आईओसी सत्र से पूर्व कल यहां अपने कार्यकारी बोर्ड की बैठक में आईओए से चुनाव कराने से पहले उसकी सभी मांगों को स्वीकार करने के लिये कहा. आईओसी ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा, ‘‘भारतीय ओलंपिक संघ(आईओए)के दिसंबर 2012 में निलंबन के बाद आईओसी राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (एनओसी) के भीतर सुशासन लाने के लिये समाधान खोजने की दिशा में काम रही है. ’’ बयान में कहा गया है, ‘‘आईओसी ने आईओए को खाका तैयार करके भेजा था और 25 अगस्त को आईओए की आम सभा में भी पर्यवेक्षक भेजे थे. कार्यकारी बोर्ड ने उनकी रिपोर्ट सुनी कि आम सभा की बैठक में आईओसी ने आईओए के संविधान में जिन संशोधनों का आग्रह किया था उनमें से अधिकतर को मंजूर कर लिया गया है लेकिन एक खास शर्त को नहीं माना गया है. ’’

आईओसी के बयान के अनुसार, ‘‘यह शर्त विशेष रुप से सदस्यों की योग्यता से संबंधित है और एनओसी में सुशासन के लिये बहुत जरुरी है. निलंबित आईओए को चुनाव प्रक्रिया शुरु करने से पहले इसको पूरी तरह से स्वीकार करना होगा. आईओसी के फैसले के बारे में आधिकारिक सूचना आईओए के पास भेजी जाएगी. ’’ आरोपपत्र संबंधी शर्त के मसले पर आईओसी के कड़े रवैये के बावजूद निलंबित आईओए ने अपना विरोधी रवैया बरकरार रखा है. उसने कहा कि इस तरह के मामलों में भारतीय कानून अहम होता है और विश्व संस्था उस पर इन प्रावधानों को नहीं थोप सकती है.

निलंबित आईओए के अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा, ‘‘हम अपने देश के कानूनों के खिलाफ नहीं जा सकते. हम अपने देश के कानून के हिसाब से अपना संविधान बनाएंगे. हमने दो सदस्यीय आईओसी प्रतिनिधिमंडल को साफ बता दिया था कि हम अपने देश के कानून के खिलाफ नहीं जा सकते. ’’ राष्ट्रमंडल खेल 2010 में भ्रष्टाचार के आरोप ङोल रहे दागी ललित भनोट के पिछले साल आईओए का महासचिव चुने जाने के बाद भारत को ओलंपिक अभियान से निलंबित कर दिया गया था.

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