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कठिन दौर में विचलित नही हुआः सोमदेव

नयी दिल्ली : भारतीय टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन जब 2011 में अपने करियर के शीर्ष पर थे तब कंधे की चोट ने उनकी शानदार लय बिगाड़ दी थी लेकिन उन्होंने कहा कि वह इस कठिन दौर से विचलित हुए बिना सत्र के अंत तक शीर्ष 100 में दोबारा प्रवेश का लक्ष्य बनाये हैं.सोमदेव ने टूर […]

नयी दिल्ली : भारतीय टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन जब 2011 में अपने करियर के शीर्ष पर थे तब कंधे की चोट ने उनकी शानदार लय बिगाड़ दी थी लेकिन उन्होंने कहा कि वह इस कठिन दौर से विचलित हुए बिना सत्र के अंत तक शीर्ष 100 में दोबारा प्रवेश का लक्ष्य बनाये हैं.सोमदेव ने टूर और डेविस कप में अपनी यादगार जीतों से भारत को एकल स्पर्धा मानचित्र पर दोबारा स्थापित किया था. धीरे धीरे वह अपनी एकल रैंकिंग में भी कदम बढ़ा रहे थे और उन्होंने 2011 के मध्य में करियर की सर्वश्रेष्ठ 62 नंबर की रैंकिंग हासिल की थी.

लेकिन 2011 के अंत में कंधे की चोट और फिर 2012 में इसकी सजर्री ने सोमदेव का करियर ग्राफ काफी प्रभावित किया. सजर्री से उबरने के बाद 2012 के पूरे सत्र में उन्होंने नौ मैच खेले जिसमें से वह केवल दो में जीत दर्ज कर पाये. इस प्रक्रिया में वह रैंकिंग में 664 स्थान पर पहुंच गये. मौजूदा वर्ष के दूसरे हाफ में हालांकि उन्होंने अपनी जगह फिर से हासिल करना शुरु कर दिया है. वह रोलां गैरां के बाद चैलेंजर्स में अच्छे प्रदर्शन से रैंकिंग में 113वें स्थान पर पहुंच गये.यह पूछने पर कि वह इस कठिन दौर को किस तरह देखते हैं और अगर उन्हें कंधे की चोट नहीं लगी होती तो यह कितना अलग होता, सोमदेव ने कहा कि वह भविष्य के बारे में सोचने को तरजीह देंगे.

सोमदेव ने कहा, ‘‘यह कहना मुश्किल है कि अगर मैं तब चोटिल नहीं होता तो मेरा करियर कैसे प्रगति करता. लेकिन मैं उस समय अच्छा टेनिस खेल रहा था. हालांकि चोटें खेल का हिस्सा होती हैं और मैं इस कठिन दौर में विचलित नहीं हुआ. ’’ अब वह फिर से उसी लय में वापसी कर रहे हैं और उनकी निगाहें एटीपी रैंकिंग में शीर्ष 100 में जगह बनाने पर लगी हैं. उन्होंने कहा, ‘‘स्वस्थ, फिट और चोटों से मुक्त रहना ही अहम है. इस साल के अंत तक शीर्ष 100 में वापसी करना शानदार होगा. ’’ हालांकि उन्हें जीत दर्ज करने में वापसी करने में काफी लंबा समय लगा. सत्र के पहले हाफ में वह बड़े टूर्नामेंट के क्वालीफायर में ही जूझते रहे.

सोमदेव ने कहा, ‘‘मैं कोर्ट के अंदर और बाहर अपने गेम पर काम करने में कड़ी मेहनत कर रहा हूं. कुछ अच्छे परिणाम हासिल करना अच्छा है. ’’ उन्होंने अंतिम टूर्नामेंट वाशिंगटन एटीपी 500 खेला था, जिसमें वह अमेरिका के जान इस्नर से भिड़े थे, जिसे उन्होंने 2007 में हराकर अपना पहला एनसीएए खिताब जीता था. सोमदेव ने कहा, ‘‘यह कठिन मैच था. जान टूर पर अच्छी सर्विस करने वाले खिलाड़ियों में से एक है और उस जैसे खिलाड़ी के खिलाफ खेलना कभी भी आसान नहीं है. ’’

Prabhat Khabar Digital Desk
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