भारतीय हॉकी टीम का कोच बनना चाहते हैं पिल्लै

Published at :22 Jul 2013 3:39 PM (IST)
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भारतीय हॉकी टीम का कोच बनना चाहते हैं पिल्लै

नयी दिल्ली:भारतीय हॉकी के लिये विदेशी कोच को गैर जरुरी बताते हुए पूर्व कप्तान और स्ट्रार स्ट्राइकर धनराज पिल्लै ने कहा है कि वह राष्ट्रीय टीम के कोच बनने को तैयार हैं और उन्होंने एक साल में नतीजे देने का दावा भी किया.धनराज ने कहा ,‘‘ भारतीय हॉकी को विदेशी कोच की जरुरत नहीं है. […]

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नयी दिल्ली:भारतीय हॉकी के लिये विदेशी कोच को गैर जरुरी बताते हुए पूर्व कप्तान और स्ट्रार स्ट्राइकर धनराज पिल्लै ने कहा है कि वह राष्ट्रीय टीम के कोच बनने को तैयार हैं और उन्होंने एक साल में नतीजे देने का दावा भी किया.धनराज ने कहा ,‘‘ भारतीय हॉकी को विदेशी कोच की जरुरत नहीं है. विदेशी कोचों पर काफी पैसा बर्बाद हो रहा है लेकिन एथेंस ओलंपिक (2004) में गेरार्ड राक से लेकर लंदन ओलंपिक (2012)में माइकल नोब्स तक नतीजा सिफर ही निकला है. भारतीय हॉकी की स्थिति जस की तस है और हम विश्व कप में जगह बनाने को संघर्ष कर रहे हैं.’’

आस्ट्रेलिया के माइकल नोब्स को हटाये जाने के बाद से भारतीय हॉकी में देशी बनाम विदेशी कोच की बहस छिड़ी हुई है. आस्ट्रेलियाई कोच रिक चाल्र्सवर्थ ने हाल ही में कहा है कि भारतीय कोच आधुनिक हॉकी की जरुरतों पर खरे नहीं उतरते.राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीतने वाली एयर इंडिया के कोच धनराज ने कहा ,‘‘ मैं कहता हूं कि मुझे भारतीय हॉकी टीम का कोच बनाकर देखें. मुझे अपनी शर्तों पर काम करने दिया जाये तो मैं एक साल में नतीजे देने का वादा करता हूं.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ पहले भी राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीतने वाली टीमों के कोच को राष्ट्रीय कोच बनाया गया. फिर वह सैड्रिक डिसूजा हो, वासुदेवन भास्करन, राजिंदर सिंह या हरेंद्र सिंह. फिर मुझे यह मौका क्यो नहीं दिया जा सकता.’’

धनराज ने कहा कि भारतीय हॉकी की जरुरतों को एक भारतीय कोच ही समझ सकता है.उन्होंने कहा ,‘‘भारत में ज्यादातर खिलाड़ी इतनी अच्छी अंग्रेजी नहीं जानते कि कोच की भाषा को समझ सके. हर कोच अपने साथ पूरा सहयोगी स्टाफ लेकर आता है लेकिन खिलाड़ी और कोच में सीधा संवाद भाषाई दिक्कत के कारण नहीं हो पाता.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ भारतीय हॉकी खिलाड़ी काफी परिपक्व हैं और उन्हें खेल सीखने की जरुरत नहीं है. भारतीय हॉकी को ऐसा विशेषज्ञ चाहिये जो व्यक्तिगत स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों से एक ईकाई के रुप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करा सके.

विदेशी कोच आते हैं और फिर जाते समय मीनमेख निकालने के अलावा कुछ नहीं करते.’’धनराज ने भारतीय हॉकी अधिकारियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा,‘‘ हमने दुनिया को हॉकी खेलना सिखाया. हमारे बड़े बड़े खिलाड़ी देशी कोचों की देन रहे. लेकिन अब जूनियर हॉकी (ग्रेग क्लार्क), महिला हॉकी (नील हागुड) , पुरुष हॉकी (रोलैंट ओल्टमेंस) की कमान विदेशियों के हाथ में है. पिछले दस साल में मैने तो टीम को कोई बड़ा टूर्नामेंट जीतते नहीं देखा.’’उन्होंने कहा ,‘‘ ओल्टमेंस यदि इतने ही काबिल हैं तो हॉकी इंडिया लीग में यूपी विजार्डस को जीत क्यो नहीं दिला सके जबकि उन्हें उनके मुताबिक टीम मिली थी. मैं भी उस टीम का तकनीकी निदेशक था और मैने उनका काम देखा है.’’

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