नेशनल गेम घोटाला : स्क्वैश कोर्ट निर्माण के टेंडर में बड़ी गड़बड़ी, बंधु ने दी थी सहमति
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Oct 2014 6:43 AM
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रांची : 34वें नेशनल गेम को लेकर धनबाद में जो स्क्वैश कोर्ट का निर्माण किया था, उसमें भी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई थी. निगरानी जांच में इसका भी खुलासा हुआ है. निगरानी ने जांच में पाया है कि स्क्वैश कोर्ट निर्माण से संबंधित एक प्राक्कलन तैयार कर एनजीओ के पदाधिकारियों ने 27 जून, 2008 […]
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रांची : 34वें नेशनल गेम को लेकर धनबाद में जो स्क्वैश कोर्ट का निर्माण किया था, उसमें भी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई थी. निगरानी जांच में इसका भी खुलासा हुआ है.
निगरानी ने जांच में पाया है कि स्क्वैश कोर्ट निर्माण से संबंधित एक प्राक्कलन तैयार कर एनजीओ के पदाधिकारियों ने 27 जून, 2008 को स्क्वैश रैकेट फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव एन रामा चंद्रा के पास भेजा.
इस अनुशंसा के बाद स्क्वैश फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मुंबई की जाइरेक्स इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को धनबाद में स्क्वैश कोर्ट निर्माण के लिए अधिकृत किया. इसके बाद कंपनी ने स्क्वैश कोर्ट निर्माण के लिए 1,44,32,850 रुपये का प्राक्कलन प्रस्तुत किया.
इसके बाद एसएम हाशमी ने चार अक्तूबर, 2008 को कला, संस्कृति एवं खेल विभाग के सचिव को प्राक्कलित राशि का आवंटन कर स्क्वैश रैकेट फेडरेशन ऑफ इंडिया को देने का अनुरोध किया.
उक्त प्रस्ताव पर निदेशक एवं सचिव की अनुशंसा के बाद विभागीय मंत्री के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया था. 20 अक्तूबर, 2008 को तत्कालीन खेल मंत्री बंधु तिर्की ने सहमति दी थी, जिसके आधार पर जाइरेक्स इंटरप्राइजेज कंपनी को स्क्वैश कोर्ट निर्माण के लिए 1,44,32,850 रुपये देने का निर्णय लिया गया.
21 अक्तूबर, 2008 को निदेशक, खेल ने कार्यकारी निदेशक, झारखंड खेल प्राधिकरण को 1,44,32,850 भुगतान करने का निर्देश स्क्वैश फेडरेशन ऑफ इंडिया को दिया. 11 दिसंबर, 2008 को स्क्वैश फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हाशमी को पत्र लिख कर अनुरोध किया था कि धनबाद में स्क्वैश कोर्ट के निर्माण के लिए प्राक्कलित राशि सीधे जाइरेक्स इंटरप्राइजेज कंपनी को दी जाये.
इसके बाद तत्कालीन सचिव ने निदेशक को निर्देश दिया कि एनजीओसी के कार्यकारी कमेटी के निर्णय की प्रत्याशा में अविलंब कार्रवाई की जाये. इसकी घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त की जाये. इसके साथ ही कंपनी को अग्रिम के रूप में 50 लाख रुपये तत्काल दिये जायें. काम होने के बाद शेष राशि दी जायेगी.
अंतत: जाइरेक्स इंटरप्राइजेज कंपनी को 1,26,73,491 रुपये का संशोधित बिल का भुगतान किया जाये. कंपनी को भुगतान का आदेश देते समय संचिका में यह टिप्पणी अंकित की गयी थी कि घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त कर ली जायेगी, लेकिन निगरानी को जांच के दौरान संचिका में घटोनत्तर स्वीकृति लिये जाने से संबंधित साक्ष्य नहीं मिले. घटनोत्तर स्वीकृति नहीं लिये जाने को निगरानी ने जांच में गलत ठहराया है.
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