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कत्ल से भी बड़ा गुनाह है मैच फिक्सिंग : धौनी

Updated at : 23 Mar 2019 2:02 AM (IST)
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कत्ल से भी बड़ा गुनाह है मैच फिक्सिंग : धौनी

नयी दिल्ली : महेंद्र सिंह धौनी अपने हाव भाव से कभी अपने जज्बात जाहिर नहीं होने देते और उनका मानना है कि यही वजह है कि लोग उनसे कभी नहीं पूछते कि 2013 आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में उन्होंने बेबुनियाद आरोपों का सामना कैसे किया. धौनी हमेशा अपना काम चुपचाप करने में विश्वास रखते हैं […]

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नयी दिल्ली : महेंद्र सिंह धौनी अपने हाव भाव से कभी अपने जज्बात जाहिर नहीं होने देते और उनका मानना है कि यही वजह है कि लोग उनसे कभी नहीं पूछते कि 2013 आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में उन्होंने बेबुनियाद आरोपों का सामना कैसे किया.

धौनी हमेशा अपना काम चुपचाप करने में विश्वास रखते हैं और कई बार उनकी खामोशी को गलत समझ लिया जाता है. उन्होंने कहा : लोगों को लगता है कि आप बहुत मजबूत हैं और लोग पूछते नहीं हैं कि आप कैसे हो.

मैंने इसका सामना ऐसे ही किया. मैं इस बारे में दूसरों से बात नहीं करना चाहता था, लेकिन अंदर से यह मुझे कुरेद रहा था. मैं नहीं चाहता कि किसी भी चीज का असर मेरे खेल पर पड़े. मेरे लिये क्रिकेट सबसे अहम है. आइपीएल 2013 मैच फिक्सिंग प्रकरण को अपने जीवन का ‘सबसे कठिन और निराशाजनक’ दौर बताते हुए महेंद्र सिंह धौनी ने सवाल दागा कि खिलाड़ियों का क्या कसूर था.
दो बार के विश्व कप विजेता कप्तान ने ‘रोर आॅफ द लायन’ डॉक्यूड्रामा में इस मसले पर अपनी चुप्पी तोड़ी. भारतीय क्रिकेट को झकझोर देने वाले इस प्रकरण में प्रबंधन की भूमिका के कारण सीएसके को दो साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा.
2013 मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर
धौनी ने कहा : 2013 मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर था. मैं कभी इतना निराश नहीं हुआ, जितना उस समय था. इससे पहले विश्व कप 2007 में निराशा हुई थी, जब हम ग्रुप चरण में ही हार गये थे, लेकिन उसमें हम खराब क्रिकेट खेले थे. उन्होंने कहा : लेकिन 2013 में तस्वीर बिल्कुल अलग थी. लोग मैच फिक्सिंग और स्पाॅट फिक्सिंग की बात करते थे. उस समय देश भर में यही बात हो रही थी.
धौनी ने हाॅटस्टार पर प्रसारित पहले एपिसोड ‘वाट डिड वी डू रांग’ में कहा कि खिलाड़ियों को पता था कि कड़ी सजा मिलने जा रही है. उन्होंने कहा : हमें सजा मिलने जा रही थी, बस यह जानना था कि सजा कितनी होगी. चेन्नई सुपर किंग्स पर दो साल का प्रतिबंध लगा. उस समय मिली जुली भावनाएं थी, क्योंकि आप बहुत सी बातों को खुद पर ले लेते हैं.
कप्तान के तौर पर यही सवाल था कि टीम की क्या गलती थी. उन्होंने कहा : हमारी टीम ने गलती की, लेकिन क्या खिलाड़ी इसमें शामिल थे. खिलाड़ियों की क्या गलती थी कि उन्हें यह सब झेलना पड़ा. उन्होंने कहा : फिक्सिंग से जुड़ी बातों में मेरा नाम भी उछला. मीडिया और सोशल मीडिया में ऐसे दिखाया जाने लगा, मानो टीम भी शामिल हो, मैं भी शामिल हूं. क्या यह संभव है.
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