T20 World Cup 2007 Winner: साल 2007 का वो सितंबर महीना भारतीय क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज है. जब महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की युवा ब्रिगेड ने साउथ अफ्रीका की धरती पर वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी. वनडे वर्ल्ड कप की हार से निराश भारतीय फैंस को इस टीम ने जश्न मनाने का एक ऐसा मौका दिया जो आज भी रोंगटे खड़े कर देता है. बिना किसी बड़े अनुभव और सीनियर खिलाड़ियों के बिना उतरी टीम इंडिया ने डरबन से लेकर जोहानिसबर्ग तक अपनी बादशाहत कायम की. यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट के एक नए युग का उदय था.
यह पहला भाग है इस स्टोरी का जिसमें हम आपको बताएंगे टी20 वर्ल्ड कप के सभी विजेताओं की कहानी. आज हम 2007 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लीग मैच से लेकर फाइनल में पाकिस्तान को हराने तक के उस रोमांचक सफर पर ले चलते हैं, जब भारत ने दुनिया को बताया कि हम ही असली चैंपियन हैं.
सफर की शुरुआत और बॉल-आउट का रोमांच
भारत के सफर की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही थी. पहला मैच स्कॉटलैंड के खिलाफ था जो बारिश के कारण रद्द हो गया. इसके बाद भारत का सामना अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से हुआ. यह मैच इतना रोमांचक था कि निर्धारित ओवरों में टाई हो गया. इसके बाद क्रिकेट इतिहास में पहली बार बॉल-आउट का सहारा लिया गया. जहां पाकिस्तान के गेंदबाज स्टंप्स पर निशाना लगाने में चूक गए, वहीं वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और रॉबिन उथप्पा ने सटीक निशाने लगाकर भारत को शानदार जीत दिलाई. इस जीत ने टीम का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था.
सुपर-8 और युवराज सिंह के 6 छक्के
सुपर-8 राउंड में भारत को न्यूजीलैंड के हाथों 10 रन से हार का सामना करना पड़ा, जिससे टीम पर दबाव आ गया. लेकिन इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ जो हुआ, उसने इतिहास बदल दिया. एंड्रयू फ्लिंटाफ से कहासुनी के बाद युवराज सिंह का गुस्सा स्टुअर्ट ब्रॉड पर फूटा. युवराज ने ब्रॉड के एक ओवर में 6 आसमानी छक्के लगाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया और महज 12 गेंदों में अर्धशतक जड़ दिया. भारत ने यह मैच 18 रन से जीता. इसके बाद करो या मरो के मुकाबले में मेजबान साउथ अफ्रीका को 37 रन से हराकर भारत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई.
सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ा
सेमीफाइनल में भारत का सामना उस समय की सबसे खतरनाक टीम ऑस्ट्रेलिया से था. कंगारुओं को हराना नामुमकिन माना जा रहा था. लेकिन युवराज सिंह ने एक बार फिर अपना जलवा दिखाया और 30 गेंदों पर 70 रन की तूफानी पारी खेली. भारत ने 188 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. जवाब में श्रीसंत की शानदार गेंदबाजी और हरभजन सिंह की फिरकी के आगे ऑस्ट्रेलियाई टीम नतमस्तक हो गई. भारत ने यह मैच 15 रन से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया, जहां एक बार फिर पाकिस्तान उसका इंतजार कर रहा था.
IND vs PAK फाइनल का महामुकाबला
24 सितंबर 2007 को जोहानिसबर्ग में खेला गया फाइनल मैच किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं था. टॉस जीतकर भारत ने पहले बल्लेबाजी की. वीरेंद्र सहवाग चोट के कारण बाहर थे, इसलिए यूसुफ पठान को मौका मिला. गौतम गंभीर ने एक छोर संभाले रखा और 75 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली. रोहित शर्मा ने अंत में 16 गेंदों पर 30 रन बनाकर भारत को 157 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. जवाब में पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही, लेकिन मिस्बाह-उल-हक ने एक छोर संभालकर मैच को आखिरी ओवर तक पहुंचा दिया. धड़कने रुकी हुई थीं और पाकिस्तान को जीत के लिए आखिरी ओवर में 13 रन चाहिए थे.
जोगिंदर शर्मा का वोऐतिहासिक आखिरी ओवर
धोनी ने आखिरी ओवर अनुभवहीन जोगिंदर शर्मा को सौंपने का जुआ खेला. पहली गेंद वाइड रही, दूसरी पर छक्का लगा. अब पाकिस्तान को 4 गेंदों पर सिर्फ 6 रन चाहिए थे और भारत के हाथ से मैच फिसलता दिख रहा था. लेकिन तभी मिस्बाह ने जोगिंदर की गेंद को पीछे की तरफ स्कूप करने की गलती कर दी. हवा में गई गेंद और नीचे खड़े थे श्रीसंत. जैसे ही श्रीसंत ने वो कैच लपका, पूरा भारत खुशी से झूम उठा. भारत ने 5 रन से मैच जीतकर पहला T20 वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया. इस जीत ने धोनी को कैप्टन कूल बना दिया और भारत को क्रिकेट का नया बादशाह. (Team India Journey League to Finals in T20 World Cup 2007).
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