India vs South Africa 1st Test: क्या होता है बॉक्सिंग डे टेस्ट, जानें इसका इतिहास

Centurion: India's Rohit Sharma during a practice session ahead of the first Test cricket match between India and South Africa, in Centurion, South Africa, Sunday, Dec. 24, 2023. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI12_24_2023_000219A)
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 26 दिसंबर को शुरू होने वाला है. इसे बॉक्सिंग डे टेस्ट कहा जाएगा. इसी दिन पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट शुरू होगा. आइए जानते हैं, इस दिन को बॉक्सिंग डे क्यों कहा जाता है.
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला आज 26 दिसंबर को शुरू होगा. इस टेस्ट को बॉक्सिंग डे टेस्ट भी कहा जाएगा. आज ही ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच दूसरा टेस्ट भी शुरू होगा. टीम इंडिया 31 साल बाद दक्षिण अफ्रीका में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने के इरादे से मैदान पर उतरेगी. वर्ल्ड कप फाइनल में हार के बाद पहली बार टीम के सीनियर खिलाड़ी मैदान पर वापसी करेंगे. कप्तान रोहित शर्मा जीत के लिए बेताब दिखे. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह हासिल करना चाहते हैं, जो अब तक किसी भारतीय टीम ने हासिल नहीं किया. टीम में विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह की भी वापसी हुई है और दोनों से काफी उम्मीदें होंगी. अब सवाल यह है कि 26 दिसंबर को बॉक्सिंग डे क्यों कहा जाता है.
बॉक्सिंग डे पर दो टेस्ट
26 दिसंबर के दिन को बॉक्सिंग डे कहा जाता है. इसका कोई मूल सिद्धांत नहीं है. इस साल इस दिन दो टेस्ट मुकाबले शुरू हो रहे हैं. रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम इंडिया, दक्षिण अफ्रीका से मुकाबला करेगी. दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच दूसरा टेस्ट शुरू होगा. हर साल क्रिकेट संस्थाएं इस दिन (बॉक्सिंग डे) कुछ महत्वपूर्ण मैचों को शेड्यूल करने का प्रयास करती हैं. इस साल भी दो बड़े इंटरनेशनल मुकाबले शुरू हो रहे हैं. लेकिन खेलों में ‘बॉक्सिंग डे’ इतना खास क्यों है? इसके बारे में जानते हैं.
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क्यों कहा जाता है बॉक्सिंग डे?
खेलों में बॉक्सिंग डे का मतलब क्रिसमस के बाद अगले दिन मैदान पर एक्शन की वापसी है. हर साल 26 दिसंबर को पूरी दुनिया में ‘बॉक्सिंग डे’ के नाम से जाना जाता है. लेकिन, ‘बॉक्सिंग’ शब्द का खेल से कोई लेना-देना नहीं है. हां, क्रिसमस त्योहार से इसका लेना-देना है. इस दिन की उत्पत्ति का स्पष्ट कारण पता नहीं है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि यह नाम उस परंपरा से आया है जहां अमीर लोग क्रिसमस के अगले दिन नौकरों और दूसरे लोगों को पैसे और उपहार से भरा एक ‘क्रिसमस बॉक्स’ देते हैं. इस बॉक्स को एक वर्ष की सेवा के लिए पुरस्कार के रूप में देखा जाता था.
अन्य तथ्य क्या हैं?
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बॉक्सिंग डे क्रिसमस के बाद चर्चों द्वारा समाज के वंचित सदस्यों के लिए धन इकट्ठा करने का एक प्रयास होता है. इसमें क्रिसमस बॉक्स को अपने अपने दरवाजे के बाहर रखने की प्रथा है. एक अन्य सिद्धांत में कहा गया है कि यह ब्रिटेन की गौरवशाली नौसैनिक परंपरा और उन दिनों से आता है जब लंबी यात्राओं के लिए पैसे का एक सीलबंद बॉक्स जहाज पर रखा जाता था. यात्रा सफल होने पर बॉक्स गरीबों में बांट दिया जाता था.
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क्रिकेट में बॉक्सिंग डे क्या है?
बॉक्सिंग डे का सीधे तौर पर क्रिकेट से नहीं जुड़ा है. बस यह परंपरा 19वीं सदी से चली आ रही है. 1865 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच शेफील्ड शील्ड मैच को ऑस्ट्रेलिया में बॉक्सिंग डे मैचों की शुरुआत माना जाता है. पिछले कुछ वर्षों में बॉक्सिंग डे टेस्ट दुनिया भर के क्रिकेट बोर्डों के कार्यक्रम का केंद्र बना हुआ है. मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका दो ऐसे देश हैं जहां बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच धार्मिक रूप से निर्धारित किया जाता है.
भारत : रोहित शर्मा (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, विराट कोहली, केएल राहुल (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, रवींद्र जडेजा, शार्दुल ठाकुर, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, मुकेश कुमार, प्रसिद्ध कृष्णा, केएस भरत (विकेटकीपर), अभिमन्यु ईश्वरन.
दक्षिण अफ्रीका : तेम्बा बावुमा (कप्तान), एडेन मार्कराम, टोनी डी जोरजी, डीन एल्गर, कीगन पीटरसन, काइल वेरिन (विकेटकीपर), ट्रिस्टन स्टब्स (विकेटकीपर), नांद्रे बर्गर, मार्को यानसन, वियान मुल्डर, गेराल्ड कोएत्जी, केशव महाराज, कैगिसो रबाडा, लुंगी एनगिडी, डेविड बेडिंघम.
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By AmleshNandan Sinha
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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