MS Dhoni: चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की अन्य टीमों से कहीं आगे है. वह इस घरेलू लीग की अब तक की सबसे सफल टीमों में से एक हैं. इस टीम के पास संयुक्त रूप से सबसे अधिक खिताब, सबसे अधिक फाइनल, सबसे अधिक प्लेऑफ और उच्चतम जीत प्रतिशत है. सभी के मन एक एक ही सवाल हमेशा रहता है कि सीएसके यह कमाल कैसे करती है? ड्वेन ब्रावो के पास इसका जवाब है. वेस्टइंडीज के इस ऑलराउंडर ने आईपीएल और सीएसके के महान खिलाड़ियों में से एक रहे हैं. अगर कोई चेन्नई के जादू को बखूबी समझता है, तो वह ड्वेन ब्रावो हैं. चेन्नई की सफलता एमएस धोनी से अलग होकर नहीं जाती और ब्रावो भी इस बात को मानते हैं. वह धोनी को उतना ही सफल मानते हैं, जितना धोनी के इस प्रिय फ्रेंचाइजी को. आइए जानते हैं ब्रावो की नजरों में वह तीन चीजें क्या हैं जो धोनी और सीएसके को इतनी सफल बनाती है.
खेल के प्रति जागरूकता
कोलकाता नाइट राइडर्स के मौजूदा मेंटर ब्रावो ने बताया कि कैसे धोनी की खेल जागरूकता गेम-चेंजर साबित हुई. महानतम भारतीय और आईपीएल कप्तान माने जाने वाले धोनी ने जब 2018 सीजन में ब्रावो को डंटा था, उस घटना को आज भी यह गेंदबाज याद करता है. अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर होने के बावजूद, ब्रावो अभी भी सबसे अच्छे फील्डरों में से एक थे. उन्होंने टीम के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, लेकिन धोनी ऐसा नहीं चाहते थे. उन्होंने ब्रावो को समझाया कि कुछ रन बचाने की कोशिश में उनका चोटिल होना टीम के लिए फायदे से ज्यादा नुकसानदायक है. इससे धोनी की हर खिलाड़ी के प्रति स्पष्ट सोच झलकती है. वह जानते हैं कि हर खिलाड़ी की चोट ने उसे कितना महत्वपूर्ण बना देती है, भले ही खिलाड़ी खुद इस बात को न समझते हों. Dwayne Bravo revealed 3 key points behind MS Dhoni and CSK success
अपने खिलाड़ियों पर भरोसा
वेस्टइंडीज के खिलाड़ी ने सीएसके के लिए गेंदबाजी करने के अपने पहले अनुभव को साझा किया. उस समय, ब्रावो पहले ही 7 साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे थे. वह अपना खेल जानते थे. अन्य कप्तानों के विपरीत जो कमान संभालना चाहते हैं, धोनी ने महसूस किया कि उन्हें ब्रावो को सब कुछ सिखाने की जरूरत नहीं है और उन्होंने उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा दिखाया. ब्रावो ने कहा, ‘2011 में सीएसके के लिए अपने पहले ही मैच में उन्होंने मुझसे मेरी फील्डिंग के बारे में पूछा. मैंने उन्हें अपनी बात बताई और उसके बाद उन्होंने मुझे फील्डिंग के बारे में कभी कुछ नहीं कहा. मुझे लगा कि उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था. तब से हम एक-दूसरे को भाई कहने लगे. उन्होंने मुझे बस अपनी मर्जी से जीने दिया.’
किसी को पहले से ही जज नहीं करते
ब्रावो ने धोनी और सीएसके के लंबे समय से मुख्य कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग द्वारा बनाए गए सकारात्मक माहौल को भी श्रेय दिया. दोनों व्यावहारिक थे. वे किसी एक मैच के अच्छे या बुरे नतीजे पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते थे. न तो किसी की जमकर आलोचना होती थी और न ही किसी की खूब तारीफ और यही उनकी सफलता का राज था. ब्रावो के सीएसके करियर में, केवल तीन बार फ्रेंचाइजी आईपीएल फाइनल में नहीं पहुंच पाई. इससे ही उनकी सफलता का अंदाजा लग जाता है. ब्रावो ने कहा, ‘वे किसी के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखते. आप अच्छा प्रदर्शन करें या न करें, उनका मिजाज नहीं बदलता. खिलाड़ियों के साथ उनका व्यवहार बेहद स्थिर रहता है. यही उस फ्रेंचाइजी और धानी की खासियत है.’
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