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ध्रुव जुरेल की टीम इंडिया में एंट्री, बैट के लिए मां ने बेच दी सोने की चेन, पिता ने लिया उधार, संघर्ष की कहानी

Updated at : 13 Jan 2024 12:00 PM (IST)
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ध्रुव जुरेल की टीम इंडिया में एंट्री, बैट के लिए मां ने बेच दी सोने की चेन, पिता ने लिया उधार, संघर्ष की कहानी

युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल की टीम इंडिया में एंट्री हो गई है. उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ पहले दो टेस्ट के लिए टीम में चुना गया है. ध्रुव के संघर्ष की कहानी काफी प्रेरणादायक है. उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में काफी आर्थिक तंगी झेली है.

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भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार देर रात इंग्लैंड के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैचों के लिए टीम की घोषणा कर दी है. युवा ध्रुव जुरेल को पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली है. तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी चोट के कारण बाहर हो गए. दक्षिण अफ्रीका दौरे के बीच ब्रेक पर जाने वाले ईशान किशन भी नहीं चुने गए. उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी ध्रुव जुरेल का टीम में शामिल होना सुर्खियों में है. 22 साल का यह खिलाड़ी दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ भारत ए टीम का हिस्सा था. उन्होंने बेनोनी में दूसरे मैच में 69 रन बनाए थे और हाल ही में रणजी ट्रॉफी में यूपी की ओर से खेलते हुए केरल के खिलाफ 63 रन बनाए थे. उन्हें टीम में तीसरे विकेटकीपर के रूप में चुना गया है. ध्रुव ने पिछले साल विदर्भ के खिलाफ प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया था. उन्होंने अब तक घरेलू सर्किट में 15 मैचों में 46 की औसत से एक शतक और पांच अर्द्धशतक के साथ 790 रन बनाए हैं.

ध्रुव जुरेल की कहानी है प्रेरणादायक

ध्रुव जुरेल के संघर्ष की कहानी काफी प्रेरणादायक है. जुरेल ने एक दैनिक अखबार के साथ बातचीत में अपने संघर्ष की कहानी बताई. उन्होंने बताया कि जब मैं आर्मी स्कूल में पढ़ता था तब छुट्टियों के दौरान आगरा के एकलव्य स्टेडियम में क्रिकेट कैंप में शामिल होने के बारे में सोचा. अपने पिता को जानकारी दिए बिना मैंने फॉर्म भर दिया. जब मेरे पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने मुझे काफी डांटा. मुझे एक क्रिकेट बैट की जरूरत थी और मेरे पिता ने 800 रुपये उधार लेकर मेरे लिए बैट खरीदा.

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क्रिकेट किट के लिए मां ने बेची सोने की चेन

ध्रुव जुरेल ने आगे बताया कि बैट तो खरीद लिया, लेकिन मुझे क्रिकेट कीट की भी जरूरत थी. जब मैंने अपने पिता से क्रिकेट किट के बारे में बताया तो उन्होंने कीमत जाननी चाही. जब मैंने उन्हें छह से सात हजार रुपये कीमत बताई तो उन्होंने मुझे खेलना बंद करने के लिए कह दिया. लेकिन मैं जिद पर अड़ा रहा. तब मेरी मां ने अपनी सोने की चेन बेच दी और उसी पैसे से मेरे लिए क्रिकेट किट खरीदा.

बेटे को सेना का जवान बनाना चाहते थे पिता

ध्रुव जुरेल ने पिछले साल हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए अपने संघर्ष के बारे में बताया था. उनके पिता कारगिल युद्ध के योद्धा थे. वह चाहते थे कि उनका बेटा भी सेना में जाए. आर्थिक तंगी के कारण ध्रुव 14 साल की उम्र में लगा कि उनका क्रिकेट अब छूट जाएगा. बैट और क्रिकेट किट नहीं मिलने के कारण वह घर से भागने की धमकी देने लगे. तब मां ने गहने बेचे और पिता ने उधार लिया.

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पिता को सुनने पड़े पड़ोसियों के ताने

ध्रुव ने बताया कि कैसे उनके क्रिकेट खेलने के कारण उनके पिता को अपने पड़ोसियों का ताना सुनना पड़ता था. पिता नेम सिंह जुरेल भी नहीं चाहते थे कि उनका बेटा कोई भी खेल खेले. लेकिन मां ने समर्थन किया और बाद में पिता को भी अपने बेटे की प्रतिभा पर गर्व हुआ. आईपीएल में राजस्थान रायल्स की ओर से ध्रुव ने एक मैच जीताऊ पारी खेली. इसके बाद उनके पिता ने उनकी मां से कहा कि तुम्हारी चेन वसूल हो गई. इस पारी के लिए ध्रुव को काफी तारीफें मिली.

टीम इंडिया में चयन पर ऐसी थी प्रतिक्रिया

ध्रुव जुरेल का टेस्ट टीम में चयन उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात थी. उन्होंने जब अपने दोस्तों को बताया कि उनका चयन भारतीय टीम में हो गया तब दोस्तों ने पूछा कि मैं किस भारतीय टीम के लिए चुना गया हूं. तब मैंने बताया कि रोहित भैया, विराट भैया वाला भारतीय टीम में. जब यह जानकारी मेरे परिवार को मिली तो मेरा पूरा परिवार भावुक हो गया.

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इंग्लैंड के खिलाफ पहले 2 टेस्ट के लिए टीम

रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, यशस्वी जयसवाल, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), केएस भरत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव , मो. सिराज, मुकेश कुमार, जसप्रीत बुमराह (उपकप्तान), आवेश खान.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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