क्या समाप्त हो चुका है महेंद्र सिंह धौनी का युग?

Updated at : 15 Dec 2014 4:49 PM (IST)
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क्या समाप्त हो चुका है महेंद्र सिंह धौनी का युग?

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने कहा है कि महेंद्र सिंह धौनी का वक्त अब बीत गया और यह सही वक्त है जब विराट कोहली को टीम की कप्तानी सौंप देनी चाहिए. ग्रेग चैपल का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पिछले कुछ दिनों से महेंद्र सिंह […]

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पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने कहा है कि महेंद्र सिंह धौनी का वक्त अब बीत गया और यह सही वक्त है जब विराट कोहली को टीम की कप्तानी सौंप देनी चाहिए. ग्रेग चैपल का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पिछले कुछ दिनों से महेंद्र सिंह धौनी अनफिट चल रहे हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि हर क्रिकेटर का एक दौर होता है, आजीवन कोई भी खिलाड़ी मैदान पर फिट नहीं रहता है. चाहे हम बात सचिन तेंदुलकर की करें या फिर रिकी पोटिंग की. हर खिलाड़ी को रिटायर होना ही पड़ता है. इस नजरिये से अगर देखा जाये, तो चैपल की सलाह सही प्रतीत होगी. महेंद्र सिंह धौनी पिछले 10 सालों से टीम इंडिया के सदस्य हैं और सात वर्ष से कप्तान हैं.

अपने कैरियर के दौरान कप्तान के रूप में धौनी ने टीम को हर वह सफलता दिलायी, जिसकी उम्मीद कोई टीम करता है. चाहे 2011 का विश्वकप खिताब हो या फिर 2007 में टी-20 वर्ल्ड का खिताब. महेंद्र सिंह धौनी ने भारतीय टीम को हर वह खिताब दिलाया या दिलाने की चेष्टा की जिसकी चाह किसी भी खिलाड़ी को होती है. महेंद्र सिंह धौनी ने भारतीय टीम को आईसीसी रैंकिंग में भी टेस्ट और एकदिवसीय मैच दोनों ही फॉरमेट में शीर्ष पर पहुंचाया. अब अगर उनकी जगह टीम की कमान विराट कोहली को सौंप दी जाये, तो इसे भविष्य को देखते हुए लिया गया आदर्श निर्णय करार दिया जायेगा.

लेकिन जहां तक बात ग्रेग चैपल के सलाह की है, तो यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि जिस वक्त वे टीम इंडिया के कोच थे, उन्होंने टीम की मिट्टी पलीद करके रख दिया था. तत्कालीन टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली के साथ उनके विवाद तो सार्वजनिक हो गये थे. उस कालक्रम में टीम इंडिया दिशाविहीन सी हो गयी थी.

ग्रेग चैपल भारतीय क्रिकेट टीम की दुर्गति करने के लिए क्या और कैसे कर रहे थे, इस संबंध में महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि वे उनपर कप्तान बनने के लिए दबाव बना रहे थे और वे यह चाहते थे कि खिलाड़ी उनकी कहे अनुसार ही हर काम करें. कुछ हद तक उनका रवैया रिंग मास्टर यानी तानाशाह जैसा था.

इन बातों पर अगर ध्यान दें, तो यह कहा जा सकता है कि धौनी को कप्तानी से हटाने की सलाह भी वे संभवत: उसी मानसिकता के साथ दे रहे होंगे, जिस मानसिकता का परिचय उन्होंने कोच रहते हुए दिया था. महेंद्र सिंह धौनी एक स्मार्ट क्रिकेटर हैं और उन्हें यह बात अच्छी तरह से मालूम है कि कौन सा खिलाड़ी कब टीम के लिए जरूरत होता है और कब उसकी जरूरत नहीं रह जाती. वैसे भी भारतीय क्रिकेट बोर्ड और उसके चयनकर्ता अपनी टीम का सलेक्शन करने में समर्थ हैं, उन्हें चैपल के सलाह की जरूरत नहीं.
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