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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, IPL स्‍पॉट फिक्सिंग में मयप्पन की भूमिका भेदिया कारोबार जैसी

Updated at : 25 Nov 2014 5:38 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, IPL स्‍पॉट फिक्सिंग में मयप्पन की भूमिका भेदिया कारोबार जैसी

नयी दिल्ली : आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई हुई और कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 तारीख का दिन मुकर्रर किया है. आज कोर्ट में आदित्य वर्मा के वकील ने यह मांग की कि मुद्गल समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाये, लेकिन बीसीसीआइ के वकील ने इसका […]

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नयी दिल्ली : आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई हुई और कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 तारीख का दिन मुकर्रर किया है. आज कोर्ट में आदित्य वर्मा के वकील ने यह मांग की कि मुद्गल समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाये, लेकिन बीसीसीआइ के वकील ने इसका विरोध किया.

सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि आईपीएल सट्टेबाजी और स्‍पॉट फिक्सिंग प्रकरण में एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन की भूमिका भेदिया कारोबारी जैसी लगती है. इसके साथ ही कोर्ट उन क्रिकेट खिलाडियों के नाम सार्वजनिक करने के अनुरोध पर सुनवाई के लिये तैयार हो गया है जिनका जिक्र न्यायमूर्ति मुद्गल समिति की रिपोर्ट में है.

न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति एफ एम कलीफुल्ला की खंडपीठ ने कहा, यदि मयप्पन सूचनायें लीक कर रहे थे और कोई अन्य सट्टा लगा रहा था तो यह भेदिया कारोबार जैसा ही हुआ. न्यायाधीशों ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब यह दलील दी गयी कि श्रीनिवासन का दामाद चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा था और सभी कार्यक्रमों में हमेशा टीम के साथ रहता था.

क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार (कैब) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि श्रीनिवासन और इंडिया सीमेन्ट्स का मयप्पन का सिर्फ उत्साही खेल प्रेमी होने संबंधी तर्क तो इस घोटाले में उस पर और आईपीएल फ्रेन्चाइजी पर पर्दा डालने का प्रयास है.

न्यायलाय ने यह भी सवाल उठाया कि मुदगल समिति की दूसरी रिपोर्ट चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक इंडिया सीमेन्ट्स और श्रीनिवासन द्वारा मयप्पन पर कथित पर्दा डालने के बारे में खामोश क्यों थी जबकि पहली रिपोर्ट में इसका जिक्र था.

दो घंटे की कार्यवाही के दौरान कैब ने न्यायालय से अनुरोध किया कि समिति की प्रथम रिपोर्ट को दूसरी रिपोर्ट के साथ पढ़ा जाना चाहिए और यदि इस मामले के सारे तथ्यों को ध्यान में रखा जाये तो पर्दा डालने के आरोप साबित होते हैं.

साल्वे ने कहा कि शीर्ष अदालत को सीवीसी के मामले में दिये गये अपने फैसले पर विचार करना चाहिए जिसमें उसने कहा था कि एक संगठन की संस्थागत निष्ठा बनाये रखी जानी चाहिए और इस व्यवस्था के आधार पर श्रीनिवासन के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

बीसीसीआई विधायी संस्था नहीं है लेकिन यह सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजन करती है और इसलिए यह न्यायिक समीक्षा के दायरे में आनी चाहिए. उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया रिपोर्ट में व्यक्ति-2 और व्यक्ति-3 के रुप में इंगित खिलाडियों की पहचान की जानी चाहिए क्योंकि उनकी पहचान को लेकर तरह तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं.

साल्वे ने कहा कि पिछली सुनवाई पर खिलाडियों के नाम सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध करके उन्होंने गलती की लेकिन अब पूरी मुद्गल समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए. साल्वे की इस दलील का बीसीसीआई ने पुरजोर विरोध किया. न्यायालय ने कहा कि खिलाडियों के नाम सार्वजनिक करने के अनुरोध पर सुनवाई की अगली तारीख पर विचार किया जायेगा. न्यायालय ने इसके साथ ही सुनवाई 27 नवंबर के लिये स्थगित कर दी.

कल कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए श्रीनिवासन के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की थी और उनसे यह सवाल किया था कि बीसीसीआई प्रमुख और चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक के तौर पर क्या हितों का टकराव नहीं होता है.बीसीसीआई के अध्यक्ष को कार्यक्रम चलाना है लेकिन आपकी तो टीम है जो सवाल पैदा करती है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
न्यायाधीशों ने कहा, यदि आप यह सब होने देंगे, आप खेल का सत्यानाश कर रहे हैं और कोई भी स्टेडियम में नहीं आयेगा. यदि जनता को यह पता चल जाये कि मैच फिक्स हैं तो कोई भी खेल देखने मैदान में नहीं आयेगा क्या यह जानते हुये भी लोग स्टेडियम में आयेंगे कि यह सब दिखावा है.
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