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जहीर के आगे कहीं नहीं टिकते हैं शास्त्री के चहेते भरत अरुण, मिला गेंदबाजी कोच का पद

Updated at : 19 Jul 2017 3:19 PM (IST)
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जहीर के आगे कहीं नहीं टिकते हैं शास्त्री के चहेते भरत अरुण, मिला गेंदबाजी कोच का पद

बीसीसीआई की समिति ने कल यह घोषणा कर दी कि जहीर खान की जगह भरत अरुण भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच होंगे, साथ ही संजय बांगर को टीम का असिस्टेंट कोच बनाया गया है. इस फैसले के साथ ही यह बात साफ हो गयी कि टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री अब अपनी […]

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बीसीसीआई की समिति ने कल यह घोषणा कर दी कि जहीर खान की जगह भरत अरुण भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच होंगे, साथ ही संजय बांगर को टीम का असिस्टेंट कोच बनाया गया है. इस फैसले के साथ ही यह बात साफ हो गयी कि टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री अब अपनी टीम के साथ भारतीय क्रिकेट को आगे लेकर जाना चाहते हैं. जहीर खान एक ऐसे गेंदबाज रहे हैं, जिन्होंने टीम इंडिया के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया, जबकि भरत अरुण का ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं रहा है, बावजूद इसके उन्हें जहीर की जगह टीम में शामिल किया गया.

जहीर के आगे कहीं नहीं टिकते हैं भरत अरुण
भरत अरुण टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री की पसंद हैं, यह उनकी सबसे बड़ी विशेषता है. हालांकि अगर उनके क्रिकेट कैरियर को देखा जाये तो उन्होंने मात्र दो टेस्ट और चार एकदिवसीय मैच खेले हैं. उनके प्रदर्शन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि टेस्ट में उन्होंने अधिकतम चार और एकदिवसीय मैच में एक विकेट लिये हैं. दोनों ही फॉरमेट में उन्होंने कुल 42 गेंदें फेंकी हैं. बैट से भी उन्होंने कुछ खास नहीं किया है टेस्ट में चार और ओडीआई में 21 रन बनाये हैं. जबकि जहीर खान ने अपने कैरियर में कुल 92 टेस्ट और 200 ओडीआई खेला है.जहीर ने टेस्ट में 311 और ओडीआई में 282 विकेट लिये हैं. टेस्ट में 11 बार उन्होंने पांच विकट लिया है जबकि ओडीआई में उन्होंने एक बार ऐसा किया. ऐसे में ना तो अनुभव और ना ही प्रदर्शन के लिहाज से भरत अरुण कहीं भी जहीर खान के सामने टिकते हैं.
भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर पर्सनल रिलेशन की बात उठी
क्रिकेट के मैदान में प्लेइंग इलेवन कौन होगा यह बात प्रदर्शन के आधार पर ही तय किया जाता है. जिस खिलाड़ी का प्रदर्शन अच्छा होता है, उसे टीम में जगह मिलती है, लेकिन की बार ऐसे मौके भी आये जब पर्सनल रिलेशन और खिलाड़ी के कद को देखते हुए उसे टीम में जगह मिली. अगर हम बात रवि शास्त्री की करें, तो सुनील गावस्कर और कपिल देव की कप्तानी में पर्सनल रिलेशन के कारण ही रवि शास्त्री टीम में काफी दिनों तक बने रहे. वीरेंद्र सहवाग के बारे में भी यह कहा जाता है कि वे फॉर्म में नहीं थे, तब भी उन्हें टीम में रखा गया. हालांकि सहवाग को टीम से निकालने का आरोप महेंद्र सिंह धौनी पर लगता है. कहा जाता है कि उन्हें धौनी ने टीम से निकलवाया यह कहकर कि वे अच्छे फील्डर नहीं हैं उन्हें फिटनेस की समस्या है.
विराट की सिफारिश पर रवि शास्त्री बने हैं कोच
बीसीसीआई सलाहकार समिति सदस्य सौरव गांगुली वीरेंद्र सहवाग को टीम का कोच बनाना चाहते थे, लेकिन विराट की सिफारिश के कारण शास्त्री को कोच बनाया गया. कहा जा रहा है कि कोहली और शास्त्री के आपसी संबंध बहुत अच्छे हैं, इसलिए कोहली शास्त्री को ही कोच बनवाना चाहते थे. गौरतलब है कि जब कोच के लिए आवेदन मांगा गया था, तो शास्त्री ने अप्लाई भी नहीं किया था, उनका नाम बाद में सामने आया. जब शास्त्री टीम के निदेशक थे, उस वक्त कोहली टेस्ट टीम के कप्तान थे और उन दोनों की अच्छी ट्‌यूनिंग देखी गयी थी.
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