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बरहरवा टोल प्लाजा विवाद: ED ने हाईकोर्ट में दायर किया शपथ पत्र, पेश किया पंकज मिश्रा की बातचीत का ब्योरा

Updated at : 21 Dec 2022 6:21 AM (IST)
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बरहरवा टोल प्लाजा विवाद: ED ने हाईकोर्ट में दायर किया शपथ पत्र, पेश किया पंकज मिश्रा की बातचीत का ब्योरा

ईडी ने कहा है कि अभिषेक श्रीवास्तव उर्फ पिंटू ने मोबाइल फोन पर महाधिवक्ता से बात की, जिसमें कहा गया है कि एक ऐसा आदमी दीजिए, जो ईडी के अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखे. उनकी जासूसी करे.

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बरहरवा टोल प्लाजा विवाद में मंत्री आलमगीर आलम व पंकज मिश्रा को क्लीनचिट देने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) ने हाइकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर दिया है. शपथ पत्र में कई सनसनीखेज तथ्यों का उल्लेख किया गया है. सूत्रों के अनुसार, ईडी के शपथ पत्र में पंकज मिश्रा और अभिषेक श्रीवास्तव उर्फ पिंटू, महाधिवक्ता सहित अन्य के बीच मोबाइल फोन से हुई बातचीत का ब्योरा पेश किया गया है.

ईडी ने कहा है कि अभिषेक श्रीवास्तव उर्फ पिंटू ने मोबाइल फोन पर महाधिवक्ता से बात की, जिसमें कहा गया है कि एक ऐसा आदमी दीजिए, जो इडी के अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखे. उनकी जासूसी करे. इडी ने कहा है कि उसके पास डाटा उपलब्ध है. हाइकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में 22 दिसंबर को मामले की सुनवाई निर्धारित है.

सूत्रों के अनुसार, शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया है कि पंकज मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद महाधिवक्ता और मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार पिंटू के बीच बातचीत हुई. इस बातचीत में पंकज मिश्रा के पास अपने करीबी लोगों को भेज कर यह जानकारी जुटाने का निर्देश दिया गया था कि इडी ने पंकज मिश्रा से कौन कौन से सवाल पूछे थे.

इसी वजह से न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान भी कई लोग पंकज मिश्रा से मिलने रिम्स गये थे. रिम्स में उससे मिलनेवालों में साहिबगंज के पुलिस अधिकारियों के अलावा रांची में पदस्थापित पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं. वहीं शपथ पत्र में पंकज मिश्रा द्वारा ईडी की कार्रवाई का विरोध करने के लिए झामुमो कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने और ईडी के विरोध में जुलूस निकालने से संबंधित निर्देश दिये जाने का ब्योरा दर्ज है.

पंकज ने ईडी का समन मिलने के बाद जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस तरह के निर्देश अपने करीबी और पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया था. साथ ही उसने टोल प्लाजा टेंडर विवाद में प्राथमिकी करानेवाले शंभुनंदन कुमार को जेल में बंद करवाने का निर्देश दिया था.

ईडी ने यह भी बताया है कि जब बरहरवा टोल प्लाजा मामले के अनुसंधानकर्ता को बुला कर पूछताछ की गयी, तो उन्होंने बताया कि डीएसपी ने उन्हें कहा था कि इस मामले में (मंत्री आलमगीर आलम व पंकज मिश्रा के खिलाफ) न तो साक्ष्य एकत्रित करना है और न ही जांच करना है. ईडी ने शंभुनंदन कुमार का बयान भी रिकॉर्ड किया है. उन्होंने बताया कि यह टोल प्लाजा महत्वपूर्ण है. यहां से पत्थर, बालू बांग्लादेश तक भेजा जाता है.

उल्लेखनीय है कि शंभुनंदन कुमार ने झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर कर बरहरवा टोल प्लाजा विवाद में पुलिस द्वारा ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को पुलिस द्वारा 24 घंटे के अंदर क्लीनचिट देने का मामला उठाया था.

इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह दलील पेश की गयी थी कि सरकार की एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच में ईडी को हस्तक्षेप करने का वैधानिक अधिकार नहीं है. कोर्ट ने शंभुनंदन की ओर से पेश किये गये तथ्यों को गंभीरता से लिया था. साथ ही पूरे प्रकरण में ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की भूमिका पर कठोर टिप्पणी की थी. अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान ईडी को अपना पक्ष पेश करने का निर्देश दिया था. इसी के आलोक में ईडी के उपनिदेशक की ओर से हाइकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर इन तथ्यों की जानकारी दी गयी है.

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