मां बगलामुखी क्यों खींचती हैं शत्रु की जीभ? जानें पौराणिक कथाओं में छिपा रहस्य

Published by :Neha Kumari
Published at :23 Apr 2026 10:00 AM (IST)
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Baglamukhi Jayanti 2026

बगलामुखी जयंती 2026

Baglamukhi Jayanti 2026: 24 अप्रैल, शुक्रवार को बगलामुखी जयंती मनाई जाएगी. चित्रों और तस्वीरों में मां को शत्रु की जीभ खींचते हुए दिखाया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? आइए, एक पौराणिक कथा के माध्यम से इसके पीछे का रहस्य जानते हैं.

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Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. माता दस महाविद्याओं में से आठवीं विद्या हैं. मां बगलामुखी को ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है. भक्तों के बीच मां का स्वरूप अत्यंत विशिष्ट है, मां एक हाथ से शत्रु की जीभ खींच रही हैं और दूसरे हाथ से उस पर गदा का प्रहार कर रही हैं. आइए जानते हैं मां की इस उग्र मुद्रा के पीछे का कारण.

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक बार पूरे ब्रह्मांड में एक अत्यंत विनाशकारी तूफान उठा. यह कोई साधारण तूफान नहीं था, बल्कि जगत को नष्ट करने वाली महाप्रलय थी. चारों ओर हाहाकार मच गया और देवताओं की शक्तियां भी इस आपदा को रोकने में विफल हो रही थीं.

असुर मदन को मिला वरदान

इसी समय मदन नाम का एक शक्तिशाली असुर हुआ करता था. उसने कठोर तपस्या के बल पर ‘वाक्-सिद्धि’ का वरदान प्राप्त किया था. इस वरदान के प्रभाव से मदन असुर की जुबान से निकला हर शब्द पत्थर की लकीर बन जाता था. वह जो कुछ भी कहता, वह सच हो जाता. शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे उसे अपनी इस शक्ति पर अहंकार हो गया. उसने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और अपनी वाणी की शक्ति से संसार में तबाही मचाने लगा. वह जो भी विनाशकारी शब्द बोलता, वह तुरंत घटित हो जाता. उसकी जुबान ही उसका सबसे बड़ा और घातक अस्त्र बन गई थी.

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने इसका समाधान खोजने का निश्चय किया. वे जानते थे कि मदन असुर की शक्ति उसकी वाणी में है और उसे हराने के लिए किसी विशेष शक्ति की आवश्यकता है.

मां बगलामुखी का प्राकट्य

भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र (गुजरात) में स्थित हरिद्रा सरोवर (हल्दी की झील) के किनारे बैठकर घोर तपस्या शुरू की. उनकी तपस्या के तेज से झील का पानी सोने की तरह चमकने लगा. तब वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को उस झील के बीच से एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई. वह ज्योति साक्षात महाशक्ति बगलामुखी थीं. मां का पूरा स्वरूप स्वर्ण के समान पीला था. उन्होंने पीले वस्त्र धारण किए हुए थे और उनकी आभा से दसों दिशाएं आलोकित हो रही थीं. इसी कारण उन्हें ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है.

जीभ खींचने का रहस्य

जब मां बगलामुखी का सामना मदन असुर से हुआ, तो वह अपनी वाक्-सिद्धि के घमंड में मां को अपशब्द कहने और विनाशकारी मंत्रों का उच्चारण करने लगा. जैसे ही उसने कुछ बोलने के लिए अपना मुख खोला, मां बगलामुखी ने अपनी दिव्य ‘स्तंभन शक्ति’ का प्रयोग किया. ‘स्तंभन’ का अर्थ होता है किसी को जड़ या निष्क्रिय कर देना. मां ने असुर की जीभ पकड़कर उसे बाहर खींच लिया. मदन असुर की सारी ताकत उसकी जुबान में थी. जीभ पकड़ते ही वह मूक हो गया और उसकी वाक्-शक्ति समाप्त हो गई.

जीभ खींचने का संदेश

मां बगलामुखी स्तंभन की देवी हैं. जीभ खींचने का अर्थ है शत्रु की वाणी को रोक देना. तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, जब शत्रु की जीभ रुक जाती है, तो वह आपके विरुद्ध षड्यंत्र नहीं कर पाता. जीभ झूठ, छल और कटु वचनों का केंद्र है. मां जीभ खींचकर व्यक्ति के भीतर के झूठ और कुतर्कों का अंत करती हैं.

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, ‘जीभ’ हमारे अनियंत्रित विचारों और अहंकार का प्रतीक है. मां हमारे भीतर के काम, क्रोध और लोभ जैसे शत्रुओं की वाणी को मौन कर देती हैं, ताकि साधक को आत्मज्ञान प्राप्त हो सके.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

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प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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