पुरुषोत्तम मास का समापन: राजगीर, मधुश्रवा और तपोवन में मलमास की पवित्र परंपरा और आध्यात्मिक महत्व

Published by : Shaurya Punj Updated At : 13 Jun 2026 11:08 AM

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मलमास की साधना समाप्त, पर भक्ति की गूंज अभी भी गुफाओं और तपोवन में जीवित है

Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास के समापन पर राजगीर, मधुश्रवा और तपोवन जैसे तीर्थस्थलों का धार्मिक महत्व बढ़ जाता है. मलमास स्नान और दान से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

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डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

Purushottam Maas: सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास (मलमास) को अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी माना गया है. इस विशेष मास का समापन 15 जून को होने जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है. इसी कारण भारत के कई तीर्थस्थलों पर इस समय विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं.

इस पावन मास का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल बिहार के नालंदा जिले का राजगीर है, जिसे पर्वतों की नगरी भी कहा जाता है. पांच पर्वतों से घिरी यह नगरी लगभग एक हजार वर्षों तक मगध साम्राज्य की राजधानी रही. यह स्थान भगवान बुद्ध और जैन तीर्थंकर महावीर के जीवन और उपदेशों का साक्षी रहा है. यहां आज भी सम्राट जरासंध, बिंबिसार और अजातशत्रु के ऐतिहासिक अवशेष और विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर मौजूद हैं.

राजगीर के सप्तकुंड और मलमास स्नान का महत्व

राजगीर में 52 कुंडों का उल्लेख मिलता है, लेकिन इनमें से सप्तकुंडों का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि मलमास के दौरान यहां देवी-देवताओं का वास होता है. इस समय देश-विदेश से श्रद्धालु यहां स्नान और दान के लिए पहुंचते हैं.

लोक मान्यता के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने इसी स्थान पर मलमास मेले की शुरुआत की थी. जब राजगीर में ध्वजारोहण होता है, उसी समय मगध के अन्य पवित्र स्थल मधुश्रवा और तपोवन में भी धार्मिक अनुष्ठान आरंभ होते हैं.

मधुश्रवा तीर्थ: रामायण काल से जुड़ा पवित्र स्थल

अरवल जिले के कलेर प्रखंड में स्थित मधुश्रवा तीर्थ को प्राचीन काल में ‘मदसरवा’ कहा जाता था. यहां स्थित श्री मधेश्वरनाथ महादेव को मगध के नव नाथों में स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने गया में पिंडदान के लिए जाते समय यहां भगवान शिव की पूजा की थी और रात्रि विश्राम भी किया था.

तपोवन: चार मानस पुत्रों और पवित्र कुंडों का स्थल

गया जिले के अतरी प्रखंड में स्थित तपोवन तीर्थ राजगीर से लगभग 16 किलोमीटर दूर है. यहां ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्रों—सनक, सनंदन, सनातन और सनत कुमार—के नाम पर चार गर्म जल कुंड हैं. यहां स्थित कपिलेश्वर नाथ महादेव मंदिर पालकालीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है. मान्यता है कि इस पवित्र स्थल के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

त्रिकोणीय पवित्र धरोहर और आध्यात्मिक महत्व

राजगीर, मधुश्रवा और तपोवन मिलकर एक त्रिकोणीय धार्मिक क्षेत्र बनाते हैं, जो हर तीन वर्ष में आने वाले मलमास के दौरान विशेष रूप से सक्रिय होता है. यह त्रिवेणी भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिकता को जीवंत बनाए रखती है और श्रद्धालुओं को गहन पुण्य लाभ प्रदान करती है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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