सोम प्रदोष व्रत के दिन जरूर सुनें यह कथा, बरसेगी महादेव की कृपा

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सोम प्रदोष व्रत कथा

Som Pradosh Vrat katha: सोम प्रदोष व्रत 2026 में 30 मार्च को रखा जाएगा. जानें पूजा का शुभ समय, विधि, और स्कंद पुराण में वर्णित प्रदोष व्रत की चमत्कारी कथा.

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Som Pradosh Vrat katha: हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. मार्च 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत 30 मार्च, सोमवार को पड़ रहा है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

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पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 मार्च को सुबह 7:10 बजे होगी और इसका समापन 31 मार्च को सुबह 6:57 बजे होगा. चूंकि प्रदोष काल 30 मार्च को ही पड़ रहा है, इसलिए इसी दिन व्रत और पूजा करना फलदायी रहेगा.

सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धालु प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करते हैं. इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अभिषेक किया जाता है. पूजा के समय धूप-दीप जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत की कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत आवश्यक है. बिना कथा के यह व्रत अधूरा माना जाता है. इसलिए पूजा के अंत में कथा का पाठ जरूर करें.

सोम प्रदोष व्रत कथा

स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक गरीब ब्राह्मणी अपने छोटे बेटे के साथ भिक्षा मांगकर जीवन यापन करती थी. एक दिन उसे नदी किनारे एक अनाथ बालक मिला, जो वास्तव में विदर्भ का राजकुमार धर्मगुप्त था.

दयालु ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई और अपने पुत्र की तरह पालन-पोषण करने लगी. कुछ समय बाद वह बच्चों के साथ ऋषि शांडिल्य के आश्रम पहुंची. ऋषि ने अपनी दिव्य दृष्टि से राजकुमार की पहचान कर ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत का महत्व बताया.

उनकी सलाह पर ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने श्रद्धा से व्रत करना शुरू किया. धीरे-धीरे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे. आगे चलकर धर्मगुप्त का विवाह गंधर्व कन्या अंशुमती से हुआ और गंधर्वों की सहायता से उसने अपना खोया राज्य वापस पा लिया. इस कथा से स्पष्ट होता है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया प्रदोष व्रत जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सफलता और सुख प्रदान करता है.

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सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है. इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है.

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