मई महीने का पहला प्रदोष व्रत कल, जल्दी से नोट कर लें पूजा सामग्री और शुभ मुहूर्त

Author :Neha Kumari
Published by :Neha Kumari
Updated at :13 May 2026 11:00 AM
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Pradosh Vrat

भगवान शिव

Pradosh Vrat 2026: कल यानी 14 मई, गुरुवार के दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत का पावन पर्व मनाया जाएगा. आइए जानते हैं इस दिन भगवान शिव की पूजा कैसे की जाती है. साथ ही जानेंगे कि इस पूजा में किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

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Pradosh Vrat 2026: हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी दिन के अनुसार उसका नाम रखा जाता है. चूंकि मई महीने का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से गुरु प्रदोष व्रत करने पर भगवान शिव के साथ-साथ देवताओं के गुरु बृहस्पति देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है.

गुरु प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई 2026,  सुबह 11:21 बजे से 
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई 2026, सुबह 08:32 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक

प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, क्योंकि इस समय महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं.

पूजा सामग्री लिस्ट

  • शुद्ध जल
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • दही
  • शहद
  • घी
  • शक्कर
  • सफेद चंदन
  • अक्षत
  • बिल्व पत्र
  • धतूरा
  • भांग
  • शमी के पत्ते
  • आक के फूल
  • सफेद फूल
  • कलावा
  • भस्म
  • शुद्ध घी
  • रुई की बत्ती
  • कपूर
  • अगरबत्ती
  • धूप
  • फल
  • मिठाई

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें.
  • दिनभर सात्विक रहें. संभव हो तो निराहार रहें, अन्यथा फलाहार व्रत रख सकते हैं. दिनभर शिव मंत्रों और भगवान शिव के नामों का मानसिक जाप करते रहें.
  • शाम को दोबारा स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें. संभव हो तो सफेद वस्त्र धारण करें.
  • शिवलिंग का पहले जल, फिर पंचामृत और अंत में दोबारा शुद्ध जल से अभिषेक करें.
  • भगवान शिव को चंदन, भस्म, बिल्व पत्र, धतूरा, फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें.
  • इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें तथा व्रत कथा और शिव चालीसा का पाठ करें.
  • अंत में घी का दीपक और कपूर जलाकर भगवान शिव की आरती करें.

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शत्रुओं के विनाश और सफलता प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन महादेव के साथ-साथ बृहस्पति देव की कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि एवं ज्ञान में वृद्धि होती है.

यह भी पढ़ें: Masik pradosh Vrat 2026: मई महीने में पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? जानें पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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