मई महीने का पहला प्रदोष व्रत आज, जल्दी से नोट कर लें पूजा सामग्री और शुभ मुहूर्त

Edited by Neha Kumari
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भगवान शिव

Pradosh Vrat 2026: आज यानी 14 मई, गुरुवार के दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत का पावन पर्व मनाया जाएगा. आइए जानते हैं इस दिन भगवान शिव की पूजा कैसे की जाती है. साथ ही जानेंगे कि इस पूजा में किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

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Pradosh Vrat 2026: हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी दिन के अनुसार उसका नाम रखा जाता है. चूंकि मई महीने का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से गुरु प्रदोष व्रत करने पर भगवान शिव के साथ-साथ देवताओं के गुरु बृहस्पति देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है.

गुरु प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई 2026,  सुबह 11:21 बजे से 
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई 2026, सुबह 08:32 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक

प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, क्योंकि इस समय महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं.

पूजा सामग्री लिस्ट

  • शुद्ध जल
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • दही
  • शहद
  • घी
  • शक्कर
  • सफेद चंदन
  • अक्षत
  • बिल्व पत्र
  • धतूरा
  • भांग
  • शमी के पत्ते
  • आक के फूल
  • सफेद फूल
  • कलावा
  • भस्म
  • शुद्ध घी
  • रुई की बत्ती
  • कपूर
  • अगरबत्ती
  • धूप
  • फल
  • मिठाई

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें.
  • दिनभर सात्विक रहें. संभव हो तो निराहार रहें, अन्यथा फलाहार व्रत रख सकते हैं. दिनभर शिव मंत्रों और भगवान शिव के नामों का मानसिक जाप करते रहें.
  • शाम को दोबारा स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें. संभव हो तो सफेद वस्त्र धारण करें.
  • शिवलिंग का पहले जल, फिर पंचामृत और अंत में दोबारा शुद्ध जल से अभिषेक करें.
  • भगवान शिव को चंदन, भस्म, बिल्व पत्र, धतूरा, फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें.
  • इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें तथा व्रत कथा और शिव चालीसा का पाठ करें.
  • अंत में घी का दीपक और कपूर जलाकर भगवान शिव की आरती करें.

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शत्रुओं के विनाश और सफलता प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन महादेव के साथ-साथ बृहस्पति देव की कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि एवं ज्ञान में वृद्धि होती है.

यह भी पढ़ें: Masik pradosh Vrat 2026: मई महीने में पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? जानें पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.

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