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रवि प्रदोष व्रत है आज, शिवजी और सूर्यदेव की आरती से दूर होंगे दुख और कष्ट

Updated at : 01 Mar 2026 8:48 AM (IST)
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Ravi Pradosh Vrat 2026

भगवान शिव (दाईं तरफ) और सूर्यदेव (बाईं तरफ)

Ravi Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत के दिन पूजा के बाद आरती का पाठ करना बेहद शुभ और फलदायक माना जाता है. बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है. इस आर्टिकल में भगवान शिव और सूर्यदेव को समर्पित आरती गीत के लिरिक्स प्रस्तुत किए गए हैं.

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Ravi Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत जब रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है. भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन सुबह सूर्य देव को जल अर्पित कर पूजा करनी चाहिए और शाम के समय प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. पूजा के अंत में हमेशा आरती का पाठ किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से दुख-दर्द का नाश होता है. इसके अलावा यह वातावरण को पवित्र करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है. साथ ही भगवान शिव और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन, गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज, चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला, वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी, कंसारी, कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक, गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी, दुखहारी, जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग-धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंगा बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

शिवजी की आरती (2)

हर हर हर महादेव!

सत्य, सनातन, सुंदर, शिव सबके स्वामी।
अविकारी, अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥
हर हर हर महादेव!

आदि, अनन्त, अनामय, अकल कलाधारी।
अमल, अरूप, अगोचर, अविचल अघहारी॥
हर हर हर महादेव!

ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर, तुम त्रिमूर्तिधारी।
कर्ता, भर्ता, धर्ता, तुम ही संहारी॥
हर हर हर महादेव!

रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय औढ़रदानी।
साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता अभिमानी॥
हर हर हर महादेव!

मणिमय भवन निवासी, अति भोगी रागी।
सदा श्मशान विहारी, योगी वैरागी॥
हर हर हर महादेव!

छाल-कपाल, गरल-गल, मुण्डमाल व्याली।
चिता भस्मतन, त्रिनयन, अयन महाकाली॥
हर हर हर महादेव!

प्रेत-पिशाच सुसेवित, पीत जटाधारी।
विवसन विकट रूपधर, रुद्र प्रलयकारी॥
हर हर हर महादेव!

शुभ्र-सौम्य, सुरसरिधर, शशिधर सुखकारी।
अतिकमनीय, शान्तिकर, शिवमुनि मनहारी॥
हर हर हर महादेव!

निर्गुण, सगुण, निरंजन, जगमय नित्य प्रभो।
कालरूप केवल हर, कालातीत विभो॥
हर हर हर महादेव!

सत्‌, चित्‌, आनंद रसमय, करुणामय धाता।
प्रेम-सुधा-निधि प्रियतम, अखिल विश्व त्राता॥
हर हर हर महादेव!

हम अतिदीन, दयामय! चरण-शरण दीजै।
सब विधि निर्मल मति कर, अपना कर लीजै॥

सूर्यदेव की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरती सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान॥

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी।
तुम चार भुजाधारी॥

अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटि किरण पसारे।
तुम हो देव महान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते।
सब तब दर्शन पाते॥

फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा।
करे सब तब गुणगान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते।
गोधन तब घर आते॥

गोधूलि बेला में,
हर घर हर आंगन में,
हो तव महिमा गान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

देव, दनुज, नर, नारी,
ऋषि-मुनिवर भजते।
आदित्य हृदय जपते॥

स्तोत्र यह मंगलकारी,
इसकी रचना न्यारी,
दे नव जीवनदान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार।
महिमा तव अपरंपार॥

प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते
बल, वृद्धि और ज्ञान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

भूचर, जलचर, खेचर,
सबके हो प्राण तुम्हीं।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं॥

वेद-पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने।
तुम ही सर्वशक्तिमान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

पूजन करती दिशाएँ,
पूजे दश दिक्पाल।
तुम भुवनों के प्रतिपाल॥

ऋतुएँ तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत, अविनाशी।
शुभकारी अंशुमान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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