भगवान विष्णु की कृपा पाने का अचूक उपाय, आज मोहिनी एकादशी पर जरूर सुनें ये व्रत कथा

Published by :Shaurya Punj
Published at :27 Apr 2026 8:07 AM (IST)
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Mohini Ekadashi vrat katha

मोहिनी एकादशी व्रत कथा

Mohini Ekadashi 2026: मोहिनी एकादशी व्रत कथा में जानें धृष्टबुद्धि की कहानी, व्रत का महत्व और भगवान विष्णु की कृपा पाने का उपाय, जो पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करता है.

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Mohini Ekadashi 2026: मोहिनी एकादशी व्रत को सनातन धर्म में सभी एकादशी व्रतों में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है. यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है. धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इस व्रत को अत्यंत पुण्यदायी, कल्याणकारी और पापों का नाश करने वाला बताया गया है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखता है तथा कथा का श्रवण या पाठ करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पाप नष्ट होते हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है.

युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण संवाद

मोहिनी एकादशी की कथा का वर्णन महाभारत काल में युधिष्ठिर और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद के रूप में मिलता है. युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है, उसका क्या फल है और उसकी विधि क्या है. इस पर श्रीकृष्ण ने बताया कि पूर्वकाल में भगवान श्रीराम ने भी महर्षि वशिष्ठ से यही प्रश्न किया था. वशिष्ठ मुनि ने कहा कि यह प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है और इससे समस्त मानव जाति का हित जुड़ा हुआ है. उन्होंने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी “मोहिनी एकादशी” कहलाती है, जो सभी पापों का नाश करने वाली और मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली है.

धृष्टबुद्धि की कथा

प्राचीन समय में सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक एक सुंदर नगर था. वहां धृतिमान नामक एक धर्मपरायण और सत्यवादी राजा राज्य करता था. उसी नगर में धनपाल नाम का एक वैद्य रहता था, जो बहुत ही धनी और परोपकारी था. वह कुएं, बगीचे, तालाब और धर्मशालाएं बनवाता था तथा भगवान विष्णु का परम भक्त था.

धनपाल के पांच पुत्र थे—सुमना, धृतिमान, मेधावी, सुकृत और धृष्टबुद्धि. इनमें सबसे छोटा धृष्टबुद्धि अत्यंत दुष्ट प्रवृत्ति का था. वह जुआ खेलता, वेश्याओं के साथ समय बिताता और पापकर्मों में लिप्त रहता था. उसे न तो देवताओं की पूजा में रुचि थी और न ही ब्राह्मणों या पितरों के सम्मान में. उसने अपने पिता की संपत्ति भी व्यर्थ में नष्ट कर दी. एक दिन उसके दुष्कर्मों से तंग आकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया और भाइयों ने भी उसका साथ छोड़ दिया. इसके बाद वह दुःख और कष्ट में इधर-उधर भटकने लगा.

महर्षि कौण्डिन्य से मार्गदर्शन

भटकते-भटकते एक दिन धृष्टबुद्धि महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पहुंच गया. उस समय वैशाख मास चल रहा था और मुनि गंगा स्नान कर लौटे थे. दुखी होकर धृष्टबुद्धि ने उनसे प्रार्थना की कि वे उसे ऐसा उपाय बताएं जिससे उसके पापों से मुक्ति मिल सके. महर्षि कौण्डिन्य ने उसे मोहिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से अनेक जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं.

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व्रत का फल और निष्कर्ष

धृष्टबुद्धि ने श्रद्धा और विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी का व्रत किया. इस व्रत के प्रभाव से वह पापों से मुक्त हो गया और अंत में भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त हुआ. इस प्रकार मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है. इस व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करने से हजारों गौदान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है और व्यक्ति का जीवन शुद्ध तथा कल्याणकारी बनता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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