छिन्नमस्ता जयंती पर करें ये साधना, दूर होंगी बाधाएं

Published by :Shaurya Punj
Published at :26 Apr 2026 4:30 PM (IST)
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Chhinnamasta Jayanti 2026

छिन्नमस्ता जयंती से पहले जानें छिन्नमस्ता मां के स्वरूप के बारे में

Chhinnamasta Jayanti 2026: छिन्नमस्ता जयंती 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व जानें. इस दिन माता की साधना से भय, बाधाएं दूर होकर जीवन में शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

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Chhinnamasta Jayanti 2026: दस महाविद्याओं में माता छिन्नमस्ता का स्थान छठा माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, वे काली कुल की देवी हैं और उन्हें प्रचंड चंडिका के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाती है. माता का स्वरूप अत्यंत उग्र और भयंकर है, इसलिए उनकी पूजा मुख्य रूप से तांत्रिक, योगी और अघोरी साधक करते हैं. मान्यता है कि उनकी उपासना से गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

छिन्नमस्ता जयंती 2026: तिथि और मुहूर्त

दृक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट पर होगी और इसका समापन 30 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर छिन्नमस्ता जयंती 30 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन साधक विशेष पूजा, जप और साधना करते हैं.

कौन हैं माता छिन्नमस्ता

माता छिन्नमस्ता दस महाविद्याओं में एक प्रमुख देवी हैं, जिनका स्वरूप रहस्यमयी और शक्तिशाली माना जाता है. उनका रूप आत्म-बलिदान और शक्ति का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने ही मस्तक को धारण किए हुए दिखाई देती हैं, जो त्याग और आत्मनियंत्रण का संदेश देता है. उनके इस उग्र स्वरूप के कारण उनकी उपासना सामान्य भक्तों की बजाय विशेष साधकों द्वारा की जाती है.

मां छिन्नमस्ता के शक्तिपीठ

माता छिन्नमस्ता के कई प्रसिद्ध शक्तिपीठ हैं, जिनमें झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित रजरप्पा मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां देवी सती का सिर गिरा था, इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है. यह मंदिर रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

छिन्नमस्ता जयंती का महत्व और लाभ

छिन्नमस्ता जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को शक्ति, साहस और मानसिक संतुलन की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि देवी की कृपा से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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