हरियाली तीज पर क्यों पहना जाता है हरा रंग? जानिए इसके पीछे का धार्मिक रहस्य और वैज्ञानिक कारण

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हरियाली तीज पर हरे रंग का महत्व

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हरियाली तीज 2026 पर हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है. जानिए हरा रंग सावन, प्रकृति और माता पार्वती से कैसे जुड़ा है और धार्मिक मान्यताओं के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से इसे ताजगी और सुकून का प्रतीक क्यों माना जाता है.

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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज का पर्व सावन महीने की हरियाली, प्रेम और सुहाग की मंगलकामना से जुड़ा माना जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. हरियाली तीज पर महिलाएं व्रत रखती हैं और हरे रंग के वस्त्र, चूड़ियां व अन्य श्रृंगार सामग्री पहनती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस पर्व पर हरा रंग इतना खास क्यों माना जाता है?

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हरियाली तीज 2026: कब रखा जाएगा व्रत?

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा बताते हैं हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे शुरू होगी और 15 अगस्त को शाम 5:28 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा.

पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 से 5:35 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 से 1:08 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:51 से 3:42 बजे तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 7:06 से 7:29 बजे तक और अमृत काल रात 8:18 से 9:53 बजे तक रहेगा.

धार्मिक दृष्टि से हरे रंग का महत्व

धार्मिक मान्यताओं में हरा रंग प्रकृति, हरियाली, उर्वरता, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. सावन में चारों ओर हरियाली छा जाती है, इसलिए इस मौसम के प्रमुख पर्व हरियाली तीज के साथ हरे रंग का विशेष संबंध बनता है.

माता पार्वती को सौभाग्य और वैवाहिक सुख की देवी माना जाता है. इसलिए महिलाएं इस दिन हरे वस्त्र और चूड़ियां पहनकर सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं.


ये भी पढ़ें: हरियाली तीज का व्रत कब रखा जाएगा? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


वैज्ञानिक आधार क्या है?

वैज्ञानिक दृष्टि से हरे रंग को प्रकृति और आंखों को मिलने वाले आराम से जोड़ा जाता है. सावन के मौसम में हरियाली का बढ़ना वातावरण को मनोवैज्ञानिक रूप से ताजगी और सुकून का अनुभव करा सकता है. हरे रंग को देखने से प्रकृति से जुड़ाव और सकारात्मक भावनाएं महसूस हो सकती हैं. हालांकि, हरा रंग पहनने से किसी धार्मिक फल की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है.

इस तरह हरियाली तीज पर हरे रंग का महत्व धार्मिक परंपरा और सावन की प्राकृतिक सुंदरता, दोनों से जुड़ा हुआ है.


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