मेष संक्रांति कल, हो रहा है बुधादित्य राजयोग का निर्माण

मेष संक्रांति 2026 (AI Generated Image)
Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति के इस साल 2026 में सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से बुधादित्य राजयोग बनेगा, जिससे करियर, धन, मान-सम्मान और सफलता के नए अवसर मिलेंगे, साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत होगी.
Mesh Sankranti 2026: संक्रांति का पर्व भगवान सूर्य देव से जुड़ा अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है. वर्ष 2026 में 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है. काशि पंचांग के अनुसार, इसी दिन से सौर नववर्ष की शुरुआत होती है. इस अवसर पर सूर्य की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है. मान्यता है कि विधिपूर्वक उपासना करने से आरोग्यता, ऊर्जा और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
मेष संक्रांति पर राजयोगों का दुर्लभ संयोग
रांची के जोड़ा के पंडित कमलेश पाठक ने बताया कि इस बार मेष संक्रांति का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के समय पहले से ही बुध ग्रह वहां स्थित रहेंगे. सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा. इसके साथ ही चंद्रमा और अन्य शुभ ग्रहों की स्थिति से वेशि राजयोग भी बन रहा है. इन दोनों राजयोगों का एक साथ बनना अत्यंत शुभ संकेत देता है, जो जीवन में पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ा सकता है.
बुधादित्य राजयोग से मिलने वाले लाभ
बुधादित्य राजयोग को बुद्धि और तेज का कारक माना जाता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता मजबूत होती है और संवाद कौशल में निखार आता है. नौकरीपेशा लोगों को तरक्की, नई जिम्मेदारियां और अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है. व्यापारियों के लिए नए अवसर और लाभ की संभावना बनती है. विद्यार्थियों के लिए यह समय पढ़ाई में सफलता और एकाग्रता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. साथ ही समाज में मान-सम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है.
खरमास समाप्ति के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत
मेष संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है. इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत करना शुभ माना जाता है. यह समय नए कार्यों की शुरुआत और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अनुकूल माना जाता है.
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मेष संक्रांति का महत्व
मेष संक्रांति को कई क्षेत्रों में सतुआन या सतुआ संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, जो इसकी लोक परंपराओं को दर्शाता है. यह दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है, जब स्नान, दान और जप-तप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्र दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसके साथ ही इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है. ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और कल्याण का वातावरण बनता है.
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By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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