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Masik Shivratri 2025: आज रखा जा रहा है मासिक शिवरात्रि का व्रत, जानें पूजा विधि

Updated at : 21 Aug 2025 8:05 AM (IST)
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Masik Shivratri 2025

Masik Shivratri 2025

Masik Shivratri 2025: भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है. इस दिन व्रत रखकर और विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. आइए जानते हैं पूजा विधि.

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Masik Shivratri 2025: सनातन धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है. मासिक शिवरात्रि इनमें से एक है. यह तिथि देवो के देव महादेव को समर्पित है. इसलिए इस दिन शिवजी की पूजा का विधान है. यह प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. इस माह में बार यह शुभ तिथि आज यानी 21 अगस्त 2025 दिन गुरुवार को है. इस कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी जातक व्रत और पूजन करता है उसको ढेरों लाभ होते हैं. साथ ही, सभी कार्य सुगमता से बनने लगते हैं. ऐसे सवाल है कि आखिर इस मासिक शिवरारात्रि को कौन से शुभ योग हैं? देवों के देव की पूजा के लाभ? मासिक शिवरात्रि का महत्व? मासिक शिवरात्रि की पूजा-विधि क्या है? आइए जानते हैं इस बारे में-

मासिक शिवरात्रि 2025 शुभ मुहूर्त (Masik Shivratri 2025 Shubh Muhurat)

  • भाद्रपद माह, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 21 अगस्त 2025, दोपहर 12:44 बजे
  • भाद्रपद माह, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि समाप्ति: 22 अगस्त 2025, सुबह 11:55 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: 21 अगस्त 2025, रात 12:02 बजे से 12:46 बजे तक

ये भी पढ़ें: Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि पर बना शुभ योग, जानें होंगे क्या क्या लाभ

मासिक शिवरात्रि पूजा विधि

मासिक शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है और इसे भगवान शिव को समर्पित किया जाता है. इस दिन उपवास और श्रद्धा के साथ शिवजी की पूजा करने से अपार लाभ होते हैं. पूजा का आरंभ दिन के शुभ समय में या रात के समय विशेष मुहूर्त में किया जाता है.

सबसे पहले, घर या मंदिर में शिवलिंग की स्थापना करें. इसे स्वच्छ जल से धोकर साफ करें और साफ कपड़े या आसन पर स्थापित करें. फिर बेलपत्र, धतूरा, चंदन, कुमकुम, फूल और अक्षत चढ़ाकर शिवजी का ध्यान करें. पूजा में घी का दीपक जलाना और धूप-अगरबत्ती का प्रयोग करना शुभ माना जाता है.

इसके बाद, ‘मंत्रोच्चारण’ और ‘शिव स्तोत्रों’ का पाठ करें. “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना अत्यंत लाभकारी है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं. अगर संभव हो तो रात्रि के 12 बजे के आसपास शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, शहद और जल से करें.

पूजा समाप्त होने के बाद, बेलपत्र और प्रसाद के रूप में फल या मिठाई भगवान शिव को अर्पित करें और फिर उसे परिवार और जरूरतमंदों में वितरित करें. इस दिन उपवास करने वाले भक्तों के सारे पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.

मासिक शिवरात्रि की पूजा न केवल आध्यात्मिक उन्नति देती है, बल्कि मन को शांति और मानसिक स्थिरता भी प्रदान करती है. इसे श्रद्धा और भक्ति भाव से करने पर भगवान शिव अपने भक्त पर विशेष कृपा करते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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