महाशिवरात्रि पर बिहार के इन पौराणिक शिवालयों में दर्शन और जलाभिषेक से जागृत होती है आध्यात्मिक चेतना

Updated at : 06 Feb 2026 6:32 PM (IST)
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Mahashivratri 2026

बिहार के प्रमुख शिव मंदिर

Mahashivratri 2026: बिहार के ये दिव्य शिव धाम न केवल हमारी गौरवशाली विरासत के प्रतीक हैं, बल्कि महाशिवरात्रि पर आध्यात्मिक ऊर्जा के अक्षय स्रोत भी बन जाते हैं. इन पवित्र स्थानों पर श्रद्धापूर्वक किया गया दर्शन और पूजन भक्तों के जीवन में सुख-शांति का संचार कराता है.

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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. महाशिवरात्रि इस साल 15 फरवरी 2026 दिन रविवार को मनायी जाएगी. शिवरात्रि के दिन विधि-विधान से महादेव की आराधना करने पर साधक को अलौकिक आत्मशक्ति प्राप्त होती है. शिवरात्रि के दिन बिहार के ये ऐतिहासिक शिवालय आध्यात्मिक चेतना के जीवंत केंद्र बन जाते हैं. इन पवित्र धामों में किया गया जलाभिषेक और रुद्राभिषेक न केवल चेतना को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और महादेव के अटूट आशीर्वाद का मार्ग प्रशस्त करता है. आइए जानते है महाशिवरात्रि के दिन बिहार के किन प्रमुख शिवालय में जाकर भगवान शिव का दर्शन कर सकते है.

बाबा गरीबनाथ धाम मुजफ्फरपुर

बाबा गरीबनाथ धाम मुजफ्फरपुर में स्थिति है. इस धाम को बिहार का देवघर कहा जाता है. यहां पर महाशिवरात्रि के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है. भक्त यहां कठिन उपवास रखकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं.

अजगैबीनाथ मंदिर सुल्तानगंज

अजगैबीनाथ मंदिर बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में गंगा नदी के किनारे स्थित है. यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक भव्यता के लिए प्रसिद्ध है. यहां शिवरात्रि पर गंगा स्नान और महादेव के पूजन का अनंत फल मिलता है.

अशोक धाम लखीसराय

अशोक धाम लखीसराय जिले में स्थित है. यहां का विशाल स्वयंभू शिवलिंग अद्भुत है. महाशिवरात्रि के दिन यहां का विशेष श्रृंगार देखने लायक होता है, जिसे देखने श्रद्धालु दूर-दूर से महादेव के दरबार में पहुंचते हैं.

बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर ब्रह्मपुर

बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर बक्सर जिले के ब्रह्मपुर में स्थित है. यह चमत्कारिक मंदिर अपनी पश्चिम मुखी दिशा के लिए विख्यात है. शिवरात्रि पर यहां ‘रुद्राभिषेक’ करने से भक्त के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं.

कुशेश्वरस्थान मंदिर दरभंगा

कुशेश्वरस्थान मंदिर दरभंगा जिले में स्थित है. ‘मिथिला के बाबाधाम’ के रूप में पूजित इस मंदिर में शिवरात्रि पर महादेव और पार्वती के विवाह का उत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है.

हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर

हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर में स्थित है. यह दुर्लभ स्थान है, जहां महादेव और विष्णु एक साथ विराजते हैं. महाशिवरात्रि पर यहां की पूजा भक्तों को हरि और हर दोनों की कृपा दिलाती है.

उगना महादेव मंदिर मधुबनी

उगना महादेव मंदिर मधुबनी में स्थित है. यह धाम महाकवि विद्यापति की भक्ति का साक्षी है. इस धाम में शिवरात्रि पर जल चढ़ाना, भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है

मुण्डेश्वरी मंदिर कैमूर

मुण्डेश्वरी मंदिर कैमूर जिले में स्थित है. यह मंदिन भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है, जहां पर शिवरात्रि की रात तंत्र और भक्ति का अनूठा संगम होता है. यहां पर माता मुण्डेश्वरी के साथ शिव की पूजा की जाती है.

सिंहेश्वरनाथ मंदिर मधेपुरा

सिंहेश्वरनाथ मंदिर मधेपुरा जिले में स्थित है. श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि पर स्थित इस मंदिर में शिवरात्रि पर लगने वाला मेला और भगवान का अभिषेक आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है.

बाबा महेंद्रनाथ मंदिर सिवान

बाबा महेंद्रनाथ मंदिर सिवान में स्थित है. विशाल सरोवर के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है. शिवरात्रि पर यहां सरोवर स्नान के बाद पूजन की विशेष परंपरा है.

कोटेश्वरनाथ धाम गया

कोटेश्वरनाथ धाम गया में स्थित है. यहां एक ही शिवलिंग पर हजारों लघु शिवलिंग उकेरे गए हैं. महाशिवरात्रि पर एक लोटा जल चढ़ाने से सहस्त्र गुना पुण्य प्राप्त होता है.

उग्रतारा स्थान सहरसा

उग्रतारा स्थान सहरसा जिले में स्थित है. यहां शिव और शक्ति की युति है. महाशिवरात्रि पर यहां की गई गुप्त साधना और पूजा भक्त की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती है.

जलेश्वरनाथ महादेव सीतामढ़ी

जलेश्वरनाथ महादेव सीतामढ़ी में स्थित है. त्रेतायुगीन आस्था से जुड़े इस मंदिर में शिवरात्रि पर जलाभिषेक करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है.

ककौलत शिव मंदिर नवादा

ककौलत शिव मंदिर नवादा जिले में स्थित है. झरने की कलकल ध्वनि के बीच स्थित यह महादेव मंदिर प्रकृति प्रेमियों और भक्तों के लिए शिवरात्रि पर विशेष गंतव्य बनता है.

मंडलेश्वरनाथ मंदिर बांका

मंडलेश्वरनाथ मंदिर बांका में स्थित है. यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से समुद्र मंथन और मंदार पर्वत से जुड़ा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव का पहला कदम यहां पड़ा था.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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