महिला को मुखाग्नि देने का अधिकार किसे है – पति,बेटा या …

Edited by Shaurya Punj
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Last Rites for Women

Last Rites for Women: हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार एक पवित्र कर्म है, जिसमें मुखाग्नि देने की परंपरा विशेष मानी जाती है. जब किसी महिला का निधन होता है, तो यह सवाल उठता है कि उसे मुखाग्नि देने का अधिकार किसे है – उसका पति, बेटा, बेटी या कोई और परिजन? जानिए धार्मिक दृष्टिकोण.

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Last Rites for Women: जीव 84 लाख योनियों में भटकने के बाद जब मनुष्य जन्म पाता है, तो यह जीवन उसे ईश्वर की कृपा से मिलता है. जन्म लेने से पूर्व वह भगवान से वादा करता है कि धरती पर आकर वह उनकी भक्ति करेगा, पूजा-पाठ में लीन रहेगा और मोक्ष का मार्ग अपनाएगा. लेकिन जैसे-जैसे वह संसार में बड़ा होता है, वैसे-वैसे भगवान की भक्ति को भूलता जाता है. सांसारिक मोह-माया, लोभ और इच्छाएं उसे घेर लेती हैं, और वह ईश्वर की साधना से दूर हो जाता है. यही मानव जीवन की सबसे बड़ी विडंबना है.

प्रक्रिया में मृतक को अग्नि देने की परंपरा को ‘मुखाग्नि’ कहते हैं. परंपरागत मान्यता के अनुसार, मुखाग्नि देने का अधिकार सबसे पहले पुत्र को दिया गया है, विशेष रूप से ज्येष्ठ पुत्र को. लेकिन जब किसी महिला का निधन होता है, तो यह सवाल उठता है कि उसे मुखाग्नि कौन दे सकता है – पति, बेटा या कोई अन्य परिजन?

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धार्मिक शास्त्रों में कही गई ये बात

धार्मिक शास्त्रों में यह कहीं स्पष्ट नहीं कहा गया है कि महिला को केवल पुत्र ही मुखाग्नि दे सकता है. हां, समाज में लंबे समय तक यह परंपरा जरूर रही है कि मुखाग्नि पुरुष सदस्य ही दें. लेकिन जैसे-जैसे समय और सोच में बदलाव आया, इस परंपरा में भी लचीलापन देखने को मिला है.

यदि महिला के पुत्र मौजूद हों, तो मुखाग्नि का दायित्व प्रायः उन्हीं को दिया जाता है. लेकिन यदि पुत्र अनुपस्थित हो या संतान न हो, तो पति को यह अधिकार मिलता है. कई धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में उल्लेख है कि पति भी पत्नी को मुखाग्नि दे सकता है. महाभारत और गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में इसके उदाहरण मिलते हैं.

सामाजिक व्यवस्था में हुआ बदलाव

वर्तमान समय में सामाजिक व्यवस्था में बदलाव के साथ यह अधिकार भाई, भतीजा, दामाद और यहां तक कि बेटी को भी दिया जाने लगा है. आज कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां बेटियों ने अपनी मां को मुखाग्नि दी और समाज ने उसे सम्मानपूर्वक स्वीकार भी किया.

धर्म का सार श्रद्धा और कर्तव्य में निहित है. इसलिए यदि कोई निकट संबंधी पूरी श्रद्धा से यह अंतिम कर्तव्य निभाना चाहता है, तो वह धार्मिक रूप से मान्य माना गया है. निष्कर्ष के रूप में, महिला को मुखाग्नि देने का अधिकार सबसे पहले पुत्र को है, परंतु परिस्थिति के अनुसार पति, अन्य पुरुष परिजन या बेटी भी यह कर्तव्य निभा सकते हैं. यह एक सकारात्मक बदलाव है, जो परंपरा और आधुनिक सोच के संतुलन को दर्शाता है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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