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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का ज्योतिषीय महत्व, जानें कैसे चंद्रमा और ग्रहों से जुड़ा है प्रेम और आस्था का यह पर्व

Updated at : 07 Oct 2025 3:43 PM (IST)
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Karwa Chauth astrological Importance

Karwa Chauth astrological Importance

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ 2025 का व्रत केवल भक्ति और प्रेम का प्रतीक नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ माना जाता है. जानिए कैसे इस दिन चंद्रमा, शुक्र और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति दांपत्य जीवन, मानसिक शांति और वैवाहिक सुख को प्रभावित करती है.

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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है. इस व्रत को महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना के लिए रखती हैं. धार्मिक दृष्टि से इस व्रत को पति-पत्नी के बीच प्रेम, सौभाग्य और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक माना जाता है. लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो यह पर्व न केवल भक्ति और प्रेम का प्रतीक है, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से जुड़ा ऊर्जावान और शुभ दिन भी है.

करवा चौथ का व्रत कब रखा जाएगा?

हर साल करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में किया जाता है. इस साल यह व्रत शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा. ज्योतिषाचारियों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा और पृथ्वी के बीच विशेष खगोलीय स्थिति बनती है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का प्रतीक माना गया है. इसलिए इस दिन उपवास और संयम रखने से मनोबल, मानसिक स्थिरता और वैवाहिक जीवन में मजबूती बढ़ती है.

चंद्रमा की पूजा का ज्योतिषीय महत्व क्या है?

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है. यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा और पृथ्वी के बीच ऊर्जा संतुलन चरम पर होता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र ग्रह दोष दूर होता है, मानसिक शांति मिलती है और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है. जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या राहु-केतु से प्रभावित है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से शुभ माना जाता है.

करवा चौथ पर शुक्र और चंद्रमा की स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शुक्र और चंद्रमा की स्थिति प्रेम, सौंदर्य और भावनाओं से जुड़ी होती है. ज्योतिष शास्त्र में शुक्र आकर्षण और दांपत्य प्रेम का प्रतिक माना जाता है और चंद्रमा भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है. इन दोनों ग्रहों की अनुकूल स्थिति से वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ती है. साथ ही, यह व्रत स्त्री की तपस्या शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाता है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

करवा चौथ का आध्यात्मिक और मानसिक महत्व क्या है?

करवा चौथ का संबंध कार्तिक महीने की आध्यात्मिक ऊर्जा से गहराई से जुड़ा है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, ध्यान और पूजा करने से आत्मिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है. यह दिन केवल वैवाहिक प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के संतुलन का भी प्रतीक है.

करवा चौथ ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों विशेष है?

ज्योतिषीय रूप से करवा चौथ केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली योग है, जो दांपत्य जीवन में प्रेम, स्थिरता और ग्रह शांति का वरदान लाता है. यह हर स्त्री के लिए श्रद्धा, संयम और आत्मबल का दिन है, जो उसे भीतर से आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है.

यह भी पढ़े: Karwa Chauth 2025: अगर चांद ना दिखे तो कैसे खोलें व्रत? जानिए आसान उपाय और शुभ मुहूर्त

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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