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कब है होली 2026? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Updated at : 28 Feb 2026 10:20 AM (IST)
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Holi 2026

होली 2026

Holi 2026: होली का त्योहार हर साल धूमधाम से पूरे देशभर में मनाया जाता है. लेकिन इस साल होली की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है. ऐसे में आइए जानते हैं साल 2026 में इस पर्व को मनाने की सही तिथि और इसे मनाने के पीछे के धार्मिक कारण.

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Holi 2026: होली को रंगों का त्योहार भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल होली का त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. यह पर्व जीवन में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी गोकुलवासियों के साथ यह त्योहार मनाया था. इस दिन बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी खुशी और उत्साह के साथ एक-दूसरे को रंग लगाकर यह पर्व मनाते हैं.

होली 2026 शुभ तिथि और मुहूर्त

  • चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि प्रारंभ:  03 मार्च 2026, मंगलवार को सुबह 05:19 बजे से
  • चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि समाप्त: 04 मार्च 2026, बुधवार को सुबह 04:15 बजे तक
  • अमृत सर्वोत्तम समय: 04 मार्च 2026, बुधवार को सुबह 06:33 बजे से 07:55 बजे तक
  • शुभ उत्तम समय: 04 मार्च 2026, बुधवार को सुबह 09:18 बजे से 10:41 बजे तक

होली पर चंद्र ग्रहण और सूतक का प्रभाव

3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लग रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. ग्रहण का सूतक सुबह से ही शुरू हो जाएगा. इसी कारण रंगों की होली 4 मार्च को खेलना शुभ रहेगा.

होली क्यों मनाई जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण अक्सर अपनी माता यशोदा से शिकायत किया करते थे कि उनका रंग सांवला क्यों है, जबकि राधा का रंग गोरा है. बाल कृष्ण की बातें सुनकर माता यशोदा मन ही मन मुस्कुराती थीं. उन्होंने मजाक में कृष्ण से कहा कि वे राधा को अपने रंग में रंग दें, ताकि दोनों के रंग में अंतर न रहे. भगवान कृष्ण ने माता की बात मान ली और राधा को रंगों से रंग दिया. तभी से होली के इस पावन पर्व की शुरुआत मानी जाती है.

होलिका दहन क्यों किया जाता है?

रंगों के त्योहार होली से ठीक एक दिन पहले पूर्णिमा की रात को ‘होलिका दहन’ किया जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका का सहारा लिया था, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था.

लेकिन जब होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, तो अधर्म का साथ देने के कारण वह स्वयं जलकर भस्म हो गई और भगवान की कृपा से भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ. यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि अहंकार और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य के सामने उसे झुकना ही पड़ता है.

होलिका दहन की सरल पूजा विधि

  • होलिका दहन से पहले घर के मंदिर में दीप जलाएं.
  • होलिका की पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें.
  • पूजा सामग्री में रोली, चावल, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग और बताशे शामिल करें.
  • होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें और नई फसल (जौ या गेहूं की बालियां) अग्नि में अर्पित करें.
  • भारत के कई हिस्सों में होलिका की अग्नि में पकोड़े डालने की परंपरा भी है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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