ग्रहण की उलझन के बीच झारखंड में होलिका दहन और होली की अनोखी परंपराएं
Published by : Shaurya Punj Updated At : 02 Mar 2026 10:03 AM
झारखंड की पारंपरिक होली
Holi 2026 in Jharkhand: झारखंड में चंद्र ग्रहण के कारण 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि 4 मार्च को रंगवाली होली. चुटिया, लोहरदगा और खूंटी में अनोखी परंपराएं दिखेंगी.
झारखंड की पारंपरिक होली
Holi 2026 in Jharkhand: होलिका दहन का पावन पर्व परंपरागत रूप से रंग वाली होली से एक दिन पहले मनाया जाता है. इस वर्ष 4 मार्च को रंगवाली होली खेली जानी है, ऐसे में सामान्य गणना के अनुसार होलिका दहन 3 मार्च को होना चाहिए था. लेकिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई है. ग्रहण के साये में धार्मिक अनुष्ठान करना शास्त्रों में वर्जित माना जाता है, इसलिए यह सवाल उठने लगा कि आखिर होलिका दहन कब किया जाए.
देश के कई प्रमुख धर्मगुरुओं और विद्वान पंडितों ने पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का अध्ययन कर स्पष्ट किया है कि 2 मार्च 2026 को होलिका दहन करना अधिक शुभ और शास्त्रसम्मत रहेगा. इसी अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगवाली होली मनाई जाएगी. इससे धार्मिक मर्यादा भी बनी रहेगी और पर्व का उत्साह भी अक्षुण्ण रहेगा.
चुटिया (रांची) में सदियों पुरानी फग डोल जतरा की परंपरा
रांची का चुटिया क्षेत्र अपनी प्राचीन परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए है. यहां 4 मार्च को फग डोल जतरा यात्रा निकाली जाएगी, जो वर्षों से श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित होती आ रही है. फग डोल जतरा यात्रा समिति के मुख्य संरक्षक विजय साहू के अनुसार, सुबह से ही लोग रंगों के साथ होली खेलेंगे. दोपहर करीब एक बजे के बाद लोग स्नान कर नए वस्त्र धारण करेंगे और यात्रा में शामिल होने की तैयारी करेंगे.
करीब दो बजे प्राचीन राम मंदिर से भगवान की विग्रहों को डोली में विराजमान कर शोभायात्रा निकाली जाएगी. डोल जतरा मैदान में इन विग्रहों को चबूतरे पर स्थापित किया जाएगा. इसके साथ ही लोअर चुटिया स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, साहू टोली के राम मंदिर और हनुमान मंदिर से भी भगवान की प्रतिमाएं डोली में लाकर मैदान में एकत्रित की जाएंगी.
बताया जाता है कि यह परंपरा वर्ष 1685 से चली आ रही है और इसकी झलक वृंदावन की होली जैसी दिखाई देती है. धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक उत्साह और सामुदायिक सहभागिता इस आयोजन को विशेष बनाते हैं.
लोहरदगा की अनोखी ‘हेलामार’ होली
झारखंड के लोहरदगा जिले में होली का स्वरूप कुछ अलग ही देखने को मिलता है. यहां कई स्थानों पर पारंपरिक होलिका दहन नहीं किया जाता, बल्कि सेमल के पेड़ की पूजा की जाती है. जल से होली खेलने और फगुआ गीत गाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है.
बरही चटकपुर गांव में सदियों पुरानी परंपरा के तहत होली के दिन एक खास लकड़ी को उखाड़ने का प्रयास किया जाता है, जबकि अन्य लोग उस पर ढेला फेंकते हैं. यह परंपरा उत्साह और साहस का प्रतीक मानी जाती है. कई आदिवासी समुदाय सूखे रंगों के बजाय केवल पानी या रंगीन पानी से होली खेलते हैं, जो प्रकृति के अधिक समीप और सरल जीवनशैली का परिचायक है.
बोड़ेया के राधा-कृष्ण मंदिर में विशेष आयोजन
बोड़ेया स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में होली का पर्व विशेष धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है. वर्ष 1665 में स्थापित यह मंदिर झारखंड के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है. यहां होली के दिन प्रभु राधा-कृष्ण की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाकर डोल चबूतरे के पास स्थापित किया जाता है.
मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों से मिलने बाहर आते हैं. विधिवत स्नान, नवीन वस्त्र धारण और अबीर में गुलाब जल मिलाकर अर्पण करने की परंपरा यहां विशेष महत्व रखती है. मंदिर परिसर में भाईचारे और उत्सव का अनूठा वातावरण बन जाता है.
संध्या समय नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत पारंपरिक नृत्य और गायन प्रस्तुत किए जाते हैं. रात्रि में पुनः स्नान के बाद विग्रहों को गर्भगृह में स्थापित किया जाता है.
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खूंटी में जनजातीय समाज की विशिष्ट परंपरा
खूंटी जिले के जनजातीय समाज में पारंपरिक होलिका दहन नहीं किया जाता. यहां सेमल की डाली में खैर घास और पुआल लपेटकर पूजा की जाती है. बलि के बाद पाहन (आदिवासी पुजारी) द्वारा दीप से अग्नि प्रज्वलित की जाती है.
जब डाली जलने लगती है, तो गांव के लोग उसे धारदार हथियार से काटते हैं. इस परंपरा को ‘पाग काटना’ कहा जाता है. धुएं की दिशा देखकर पाहन आगामी वर्ष के मौसम का अनुमान लगाता है.
अगले दिन गांववासी होलिका स्थल पर जाकर राख का तिलक लगाते हैं और सामूहिक नृत्य-गायन करते हैं. कई स्थानों पर इसके बाद लोग जंगल की ओर शिकार के लिए भी निकलते हैं, जो उनकी पारंपरिक जीवनशैली का हिस्सा है.
परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विविधता का संगम
झारखंड में होली और होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक एकता का प्रतीक हैं. ग्रहण की उलझन के बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ है. 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों की होली के साथ पूरा प्रदेश आस्था, उल्लास और परंपरा के रंग में रंगने को तैयार है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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