इस व्रत कथा के बिना पूरी नहीं होती है गंगा सप्तमी

Published by :Shaurya Punj
Published at :23 Apr 2026 8:59 AM (IST)
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Ganga Saptami Vrat Katha

गंगा सप्तमी व्रत कथा

Ganga Saptami Vrat katha: गंगा सप्तमी वैशाख शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है. इस दिन गंगा स्नान, पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व है, जिससे पापों का नाश और जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है.

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Ganga Saptami Vrat Katha: आज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, और इस पावन अवसर पर गंगा सप्तमी मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा का प्राकट्य हुआ था. इस दिन भक्त पवित्र गंगा नदी में स्नान-ध्यान करते हैं और उसके बाद विधिपूर्वक पूजा, जप और तप करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है. गंगा सप्तमी के दिन व्रत कथा और आरती पढ़ना विशेष फलदायी माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है.

पौराणिक मान्यता और महत्व

स्कंदपुराण के अनुसार, वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं. इसलिए इस दिन को गंगा जयंती या गंगा सप्तमी कहा जाता है. वहीं, जिस दिन गंगा पृथ्वी पर पूर्ण रूप से अवतरित हुईं, उसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है. गंगा जयंती के दिन स्नान और पूजन करने से रिद्धि-सिद्धि, यश और सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का नाश होता है.

गंगा सप्तमी की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर उतरीं. वे भगीरथ के पीछे-पीछे उनके पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए आगे बढ़ीं, लेकिन उनका वेग अत्यंत तीव्र था. रास्ते में आने वाली हर वस्तु उनके साथ बहने लगी. इसी दौरान गंगा का जल जाह्नु ऋषि के आश्रम में पहुंच गया और उसे जलमग्न कर दिया. इससे क्रोधित होकर ऋषि ने पूरी गंगा को पी लिया. भगीरथ की विनती पर उन्होंने गंगा को अपने कान से पुनः प्रवाहित किया. इसी कारण गंगा “जाह्नवी” के नाम से भी प्रसिद्ध हुईं. उल्लेखनीय है कि गंगा का मूल प्राकट्य भगवान विष्णु के चरणों से माना जाता है.

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गंगा सप्तमी 2026 आज

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10:48 बजे से प्रारंभ होकर 23 अप्रैल की रात 8:49 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार गंगा सप्तमी का पर्व 23 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा. इस दिन प्रातःकाल गंगा स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है, जो भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायक माना गया है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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