बगलामुखी जयंती 2026, शत्रुनाश और विजय का महापर्व

Published by :Shaurya Punj
Published at :23 Apr 2026 1:20 PM (IST)
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Baglamukhi Jayanti 2026

बगलामुखी जयंती 2026

Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती वैशाख शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन पूजा, साधना और व्रत से शत्रुनाश, भय से मुक्ति और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.

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Baglamukhi Jayanti 2026: वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी का अवतरण दिवस माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी जयंती मनाने की परंपरा है. इस पावन अवसर पर भक्त व्रत रखकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. देशभर में कई स्थानों पर अनुष्ठान और महायज्ञ आयोजित किए जाते हैं. मान्यता है कि माता की कृपा से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन के संकट दूर होते हैं.

बगलामुखी जयंती 2026 कल

वर्ष 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल को मनाई जाएगी. यह पर्व हर साल वैशाख शुक्ल अष्टमी को आता है, क्योंकि इसी दिन मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था. इस दिन साधक विशेष साधना, जप और पूजा के माध्यम से माता को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं और उनसे संरक्षण एवं विजय का आशीर्वाद मांगते हैं.

मां बगलामुखी की पूजा का महत्व

मां बगलामुखी की उपासना से भय का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. उन्हें बुरी शक्तियों का विनाश करने वाली देवी माना जाता है. इनका एक नाम “पीताम्बरा” भी है, क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है. पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल और हल्दी का विशेष महत्व होता है. दसमहाविद्याओं में मां बगलामुखी को आठवीं महाविद्या माना गया है और वे “स्तम्भन शक्ति” की अधिष्ठात्री देवी हैं. वाद-विवाद में विजय, वाक सिद्धि और बाधाओं से मुक्ति के लिए उनकी आराधना की जाती है.

मां बगलामुखी के नाम और स्वरूप का रहस्य

“बगला” शब्द संस्कृत के “वल्गा” से बना माना जाता है, जिसका अर्थ सुंदर या दुलहन होता है. मां बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है. वे रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान रहती हैं और शत्रुओं का नाश करने वाली शक्ति का प्रतीक हैं. देवी को प्रसन्न करने के लिए नारियल, पीले फूल और पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा बड़े से बड़े संकट को भी दूर कर सकती है.

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मां बगलामुखी की उत्पत्ति कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय भयंकर तूफान और बाढ़ से सृष्टि के विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया था. सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे. तब यह निर्णय हुआ कि केवल देवी शक्ति ही इस संकट को दूर कर सकती हैं. इसके बाद मां बगलामुखी हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुईं और उन्होंने अपनी शक्ति से उस भयानक संकट को शांत किया. तभी से उन्हें विपत्तियों और बुराइयों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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