सावन में नहीं सोता सुलतानगंज, 24 घंटे जागती रहती है शिवभक्ति

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सावन

कांवरियां

सावन के महीने में सुलतानगंज एक अनूठा शहर बन जाता है, जहां शिवभक्ति रात-दिन गूंजती रहती है. कांवरियों की सेवा और 'बोल बम' के नारों से यह शहर 24 घंटे जीवंत रहता है.

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शुभंकर, सुलतानगंज (भागलपुर)

Sawan 2026: श्रावणी मेले के दौरान सुलतानगंज की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में होती है, जो पूरे सावन जागता रहता है. यहां उत्तरवाहिनी गंगा के घाटों पर 24 घंटे कांवरियों की भीड़ रहती है. दिन हो या आधी रात, श्रद्धालु गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होते रहते हैं. 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा शहर गूंजता रहता है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बाजार, भोजनालय, धर्मशालाएं और सेवा शिविर भी पूरी रात खुले रहते हैं.

केसरिया रंग में रंग जाता है पूरा शहर

सावन शुरू होते ही सुलतानगंज का माहौल पूरी तरह बदल जाता है. रेलवे स्टेशन से लेकर अजगैवीनाथ मंदिर, नमामि गंगे घाट, कांवरिया पथ, बाजार और धर्मशालाओं तक हर ओर केसरिया रंग दिखाई देता है. देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा नेपाल और भूटान से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. वे उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर 98 किलोमीटर दूर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं. यह यात्रा दिन-रात लगातार चलती रहती है.

रात में भी नहीं रुकती सेवा

श्रावणी मेले के दौरान पूरा सुलतानगंज एक बड़े सेवा शिविर में बदल जाता है. रात के तीन बजे भी चाय की दुकानें खुली रहती हैं. फूल, बेलपत्र और पूजा सामग्री की दुकानें श्रद्धालुओं की सेवा में लगी रहती हैं. भोजनालयों में खाना मिलता है और धर्मशालाओं में कांवरियों के ठहरने की व्यवस्था रहती है. वहीं पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सफाईकर्मी और प्रशासन के कर्मचारी भी चौबीसों घंटे अपनी ड्यूटी निभाते हैं. यहां समय घड़ी नहीं, बल्कि कांवरियों के कदम तय करते हैं.

'बाबा का दरबार कभी खाली नहीं रहता'

स्थानीय मास्टर पंडा अरुण कुमार झा कहते हैं, "सावन में बाबा का दरबार कभी सूना नहीं होता. मां गंगा से जल भरने का सिलसिला पूरे 24 घंटे चलता रहता है. हर पल यहां शिवभक्ति का उत्सव दिखाई देता है." व्यवसायी संजय चौधरी बताते हैं, "श्रावणी मेले के दौरान सुलतानगंज लघु भारत बन जाता है. अलग-अलग भाषा, वेशभूषा और संस्कृति के लोग यहां आते हैं, लेकिन सबकी पहचान सिर्फ एक होती है  'बम'."

हजारों परिवारों की आजीविका का सहारा है श्रावणी मेला

श्रावणी मेला सिर्फ आस्था का पर्व नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का भी सबसे बड़ा माध्यम है. होटल, धर्मशाला, भोजनालय, फल-फूल, बेलपत्र, पूजा सामग्री, परिवहन और अस्थायी दुकानों से जुड़े लोग पूरे साल इस एक महीने का इंतजार करते हैं. कई परिवार पूरे सावन कांवरिया पथ पर ही अपना अस्थायी ठिकाना बना लेते हैं. उनके लिए शिवभक्तों की सेवा ही रोजगार भी है और पुण्य का काम भी.

यहां रात नहीं ढलती, शिवभक्ति की नई सुबह होती है

सुलतानगंज में सावन केवल कैलेंडर का एक महीना नहीं है, बल्कि यह आस्था का सबसे बड़ा उत्सव है. यहां दिन हो या रात, हर समय 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहते हैं. ऐसा लगता है जैसे यहां रात कभी खत्म नहीं होती, बल्कि हर रात शिवभक्ति की एक नई सुबह में

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नेहा कुमारी

लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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