गंगा सप्तमी आज है, करें मां जाह्नवी की स्तुति और स्तोत्र का पाठ, जीवन में आएगी खुशहाली

Published by :Neha Kumari
Published at :23 Apr 2026 7:57 AM (IST)
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Ganga Saptami 2026

गंगा सप्तमी 2026

Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर श्रद्धालु गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन गंगा स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की वृद्धि होती है.

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Ganga Saptami 2026: आज 23 अप्रैल 2026 को गंगा सप्तमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. इसे ‘गंगा जयंती’ और ‘जाह्नवी सप्तमी’ के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से गंगा नदी में स्नान कर अर्घ्य देते हैं. माना जाता है कि इस दिन माता गंगा की स्तुति और स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है. ऐसा करने से जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

श्री गंगा जी की स्तुति

 गाङ्गं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम्.
त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु माम्॥

मां गंगा स्तोत्रम्

देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे.
शङ्करमौलिविहारिणि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले॥१॥

भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव
जलमहिमा निगमे ख्यातः.
नाहं जाने तव महिमानं
पाहि कृपामयि मामज्ञानम्॥२॥

हरिपदपाद्यतरङ्गिणि गङ्गे
हिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे.
दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं
कुरु कृपया भवसागरपारम्॥३॥

तव जलममलं येन निपीतं
परमपदं खलु तेन गृहीतम्.
मातर्गङ्गे त्वयि यो भक्तः
किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः॥४॥

पतितोद्धारिणि जाह्नवि गङ्गे
खण्डितगिरिवरमण्डितभङ्गे.
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये
पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये॥५॥

कल्पलतामिव फलदां लोके
प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके.
पारावारविहारिणि गङ्गे
विमुखयुवतिकृततरलापाङ्गे॥६॥

तव चेन्मातः स्रोतःस्नातः
पुनरपि जठरे सोऽपि न जातः.
नरकनिवारिणि जाह्नवि गङ्गे
कलुषविनाशिनि महिमोत्तुङ्गे॥७॥

पुनरसदङ्गे पुण्यतरङ्गे
जय जय जाह्नवि करुणापाङ्गे.
इन्द्रमुकुटमणिराजितचरणे
सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये॥८॥

रोगं शोकं तापं पापं
हर मे भगवति कुमतिकलापम्.
त्रिभुवनसारे वसुधाहारे
त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे॥९॥

अलकानन्दे परमानन्दे
कुरु करुणामयि कातरवन्द्ये.
तव तटनिकटे यस्य निवासः
खलु वैकुण्ठे तस्य निवासः॥१०॥

वरमिह नीरे कमठो मीनः
किं वा तीरे शरटः क्षीणः.
अथवा श्वपचो मलिनो दीनः
तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः॥११॥

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये
देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये.
गङ्गास्तवमिमममलं नित्यं
पठति नरो यः स जयति सत्यम्॥१२॥

येषां हृदये गङ्गाभक्तिः
तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः.
मधुराकान्तापज्झटिकाभिः
परमानन्दकलितललिताभिः॥१३॥

गङ्गास्तोत्रमिदं भवसारं
वाञ्छितफलदं विमलं सारम्.
शङ्करसेवकशङ्कररचितं पठति
सुखी स्तव इति समाप्तम्॥१४॥

गंगा सप्तमी का महत्व

  • पापों का नाश: अनजाने में किए गए मानसिक और शारीरिक पापों से मुक्ति मिलती है.
  • ग्रह दोष से राहत: कुंडली में शनि और राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
  • मानसिक शांति: गंगा स्तुति का पाठ करने से एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव दूर होता है.

आज क्या करें?

  • स्नान और अर्घ्य: सूर्योदय के समय स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित करें.
  • दान का महत्व: आज के दिन गुड़, सत्तू और ब्राह्मणों को वस्त्र दान करना ‘अक्षय पुण्य’ प्रदान करता है.
  • दीपदान: शाम के समय किसी पवित्र नदी या घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर मां गंगा की आरती करें.

यह भी पढ़ें: Ganga Saptami से पहले पढ़ें मां गंगा के जाह्नवी नाम का रहस्य

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

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प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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